mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

तीसरी आंख खोलने का सबसे आसान तरीका

तीसरी आंख खोलने का सबसे आसान तरीका





तीसरी आंख (अजना चक्र) खोलने का सबसे आसान और सुरक्षित तरीका नियमित ध्यान, योग, और मानसिक जागरूकता के अभ्यास के साथ जुड़ा है। यहां कुछ सरल तरीके दिए गए हैं जो तीसरी आंख को खोलने और सक्रिय करने में मदद कर सकते हैं: 1. ध्यान (Meditation): अजना चक्र ध्यान: ध्यान करते समय अपने माथे के बीच (भौहों के बीच) पर ध्यान केंद्रित करें। इसे "त्रिकुटी" या "तीसरी आंख" का स्थान माना जाता है। आँखें बंद करके गहरी सांस लें और उस बिंदु पर ऊर्जा या हल्की सिहरन महसूस करने का प्रयास करें। यह ध्यान नियमित रूप से 10-15 मिनट करने से तीसरी आंख की जागरूकता बढ़ सकती है। 2. ओम मंत्र का जप: "ओम" ध्वनि का गहरा संबंध तीसरी आंख से होता है। नियमित रूप से ओम मंत्र का जप करने से अजना चक्र पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। ओम मंत्र की गूँज आपके माथे के बीच कंपन पैदा करती है, जिससे तीसरी आंख जागृत होती है। 3. त्राटक ध्यान (Candle Gazing): किसी मोमबत्ती की लौ पर बिना पलक झपकाए ध्यान करें। लौ को एकाग्रता का केंद्र बनाएं। इससे आपकी मानसिक स्पष्टता और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है। इसे कुछ मिनटों तक करें, फिर आंखें बंद करें और उस लौ की छवि को तीसरी आंख के स्थान पर महसूस करें। यह आपकी तीसरी आंख को सक्रिय करने में मदद करता है। 4. ब्रह्मचर्य और स्वच्छ जीवनशैली: तीसरी आंख की शक्ति को बढ़ाने के लिए स्वच्छ आहार, सादा जीवन और ब्रह्मचर्य का पालन लाभदायक होता है। अधिक प्राण ऊर्जा (life force energy) को संरक्षित करने से यह ऊर्जा आपकी तीसरी आंख पर काम करती है। 5. आहार और जीवनशैली: संतुलित और शुद्ध आहार का सेवन करें, जैसे ताजे फल, सब्जियां, और विशेष रूप से नीले या बैंगनी रंग के खाद्य पदार्थ (जैसे ब्लूबेरी, अंगूर)। रासायनिक या हानिकारक पदार्थों (जैसे शराब, नशीली चीजें) से दूर रहें, क्योंकि ये तीसरी आंख की ऊर्जा को अवरुद्ध कर सकते हैं। 6. प्राणायाम (Breathing Exercises): नियमित प्राणायाम, विशेषकर अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास करें। ये श्वास विधियाँ मानसिक शांति लाने के साथ-साथ तीसरी आंख की ऊर्जा को सक्रिय करती हैं। 7. आत्म-अवलोकन (Self-awareness): अपनी अंतरात्मा और अंतर्ज्ञान को समझने के लिए आत्म-अवलोकन करें। ध्यान दें कि आपको किसी चीज़ के बारे में कैसा महसूस होता है। यह आपकी तीसरी आंख के माध्यम से आपके अंतर्ज्ञान को बेहतर बनाने में मदद करता है।

Comments

Popular posts from this blog

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?