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Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

lekin kisi ko mantra jaap krna hai to swar vigyan main saanson k saath kaise kare? koi ek naam ka to bataya bt mantra ka kaise ?? ajapa jap kaise ho ?? plz bataiye

 अजपा जाप का अर्थ है कि मंत्र का स्मरण धीरे-धीरे श्वास के साथ सहज रूप से चलने लगे, बिना जोर लगाए। स्वर-विज्ञान की दृष्टि से पहले शांत होकर अपनी स्वाभाविक श्वास को देखें। श्वास अंदर लेते समय मंत्र का पहला भाग और बाहर छोड़ते समय दूसरा भाग मानसिक रूप से जोड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए “सो” श्वास अंदर और “हम” श्वास बाहर। यदि कोई दूसरा मंत्र साधना में मिला है, तो उसे गुरु द्वारा बताए गए उच्चारण और विधि के अनुसार ही करें। शुरुआत में मानसिक जाप करें, फिर श्वास और मंत्र की लय स्वाभाविक होने दें। यही अभ्यास धीरे-धीरे अजपा-जाप की अनुभूति की ओर ले जा सकता है।

Mai jab rat ko sone jati hun tab mujhe blue colour ke dhabe dikhate hai aakho ke beech mai

 आध्यात्मिक दृष्टि से ध्यान या सोने से पहले आँखों के बीच नीले रंग के धब्बे या प्रकाश दिखाई देना आज्ञा चक्र से जुड़ा अनुभव माना जाता है। साधना के दौरान मन भीतर की ओर शांत होने पर कभी-कभी नीली, बैंगनी या सफेद रोशनी जैसी अनुभूतियाँ हो सकती हैं। इसे देखकर डरने या इसे तुरंत कोई बड़ी सिद्धि मानने की आवश्यकता नहीं है। बस सहज रहें, प्रकाश को पकड़ने या जबरदस्ती देखने की कोशिश न करें और अपनी श्वास पर ध्यान रखें

Mujhe harpal nind aa rahaa hai,kya karu?

 ध्यान करते समय नींद आना बहुत सामान्य है। अक्सर इसका कारण शरीर की थकान, कम नींद, भोजन के बाद ध्यान करना या बहुत आरामदायक मुद्रा हो सकता है। आप ये उपाय करें: ध्यान सुबह या नहाने के बाद करें। रीढ़ सीधी रखें, लेटकर ध्यान न करें। भोजन के तुरंत बाद ध्यान न करें। शुरुआत में केवल 10–15 मिनट बैठें। आँखें बंद करते ही नींद आए तो कुछ मिनट धीमी गहरी श्वास लें। पर्याप्त रात की नींद लें। ध्यान में शांति और जागरूकता दोनों जरूरी हैं— नींद को आध्यात्मिक संकेत मानकर उसके पीछे न जाएँ। यदि दिनभर असामान्य रूप से बहुत नींद आती है, तो नींद की गुणवत्ता और स्वास्थ्य कारणों पर भी ध्यान दें।

Mujhe andhere ki awaaz sunai deti Hai Ajeeb Sa kida Hai Jo har samay mere Sath chalta hai kya koi Bata sakta hai yah kya hai aur use kide ki awaaz mein aur gahrai se agar suno to ek tar hai jo baj raha hai aur FIR band ho jata hai

  Mujhe andhere ki awaaz sunai deti Hai Ajeeb Sa kida Hai Jo har samay mere Sath chalta hai kya koi Bata sakta hai yah kya hai aur use kide ki awaaz mein aur gahrai se agar suno to ek tar hai jo baj raha hai aur FIR band ho jata hai ? इसे तुरंत अनाहद नाद मान लेना उचित नहीं होगा। ध्यान की आध्यात्मिक परंपराओं में भीतर सुनाई देने वाली सूक्ष्म ध्वनियों को कभी-कभी अनाहद नाद कहा जाता है, लेकिन कान में लगातार आवाज़, भनभनाहट या तार जैसी ध्वनि टिनिटस जैसी सामान्य श्रवण-समस्या से भी जुड़ी हो सकती है। आपने बताया कि आवाज़ हर समय साथ रहती है और ध्यान से सुनने पर तार जैसी ध्वनि आती है—इसलिए उसे पकड़ने या बहुत गहराई से सुनने की कोशिश न करें।

om sohum ajun brahmashmi ka naam jaap kar sakte h kya??

 हाँ, आप “ॐ सोऽहम्” और “अहं ब्रह्मास्मि” दोनों का जाप कर सकते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से “सोऽहम्” श्वास के साथ सहज रूप से किया जाने वाला मंत्र है—श्वास लेते समय “सो” और छोड़ते समय “हम” का भाव रखें। “अहं ब्रह्मास्मि” आत्मा और परम सत्य की एकता का चिंतन कराता है। शुरुआत में किसी एक मंत्र को नियमित रूप से करना बेहतर रहेगा, ताकि मन एकाग्र हो। जाप करते समय जल्दबाजी या किसी विशेष अनुभव की अपेक्षा न रखें। श्रद्धा, शांति और नियमितता को महत्व दें

ध्यान में बैठे ती हू मेरे नाक की हड्डी में खुजली होने लगती हैं और कभी-कभी सोते समय भी इसका क्या कारण है कृपया करके उत्तर दें

 आध्यात्मिक दृष्टि से ध्यान के समय नाक की हड्डी या आसपास खुजली होना प्राण के प्रवाह, एकाग्रता और शरीर की सूक्ष्म संवेदनाओं के प्रति बढ़ती जागरूकता से जोड़ा जा सकता है। जब मन शांत होता है, तो सामान्यतः अनदेखी रहने वाली हल्की खुजली, कंपन या स्पंदन अधिक स्पष्ट महसूस होने लगते हैं। कुछ साधना परंपराएँ इसे प्राणवायु की सक्रियता से भी जोड़ती हैं। सोते समय ऐसा होना जरूरी नहीं कि इसका आध्यात्मिक कारण ही हो;

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

dhayan lgate samay kuch samay bad muladhar se vishudhi chakkar ke bich tej khichav hota hai....

dhayan lgate samay kuch samay bad muladhar se vishudhi chakkar ke bich tej khichav hota hai, jis se pet andar ki aur khich jata hai aur apne aap kafi der tak swash ruk jati, aur gale me ajib sa bahri pan mahsus hota hai, kripya marg darshan kre. ??  आध्यात्मिक दृष्टि से यदि ध्यान के दौरान मूलाधार से विशुद्धि चक्र तक खिंचाव, पेट का भीतर की ओर जाना, कुछ समय के लिए श्वास का स्वतः रुक जाना और गले में भारीपन महसूस होता है, तो कई साधना परंपराएँ इसे प्राणशक्ति के संतुलन या आंतरिक एकाग्रता की प्रक्रिया से जोड़कर देखती हैं। यदि यह अनुभव बिना किसी पीड़ा, घबराहट या तकलीफ़ के हो रहा है, तो इसे शांत भाव से देखें और इसके पीछे भागने या डरने की आवश्यकता नहीं है। ध्यान के समय शरीर को सहज रखें, श्वास को कभी भी जानबूझकर न रोकें और किसी अनुभव को लक्ष्य न बनाएं। नियमित नाम सिमरन, गुरु के बताए मार्ग और संतुलित जीवनचर्या पर ध्यान दें। यदि यह खिंचाव, सांस रुकने की स्थिति या गले का भारीपन अत्यधिक बढ़ जाए, घबराहट हो या दैनिक जीवन को प्रभावित करे, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य परामर्श लें, ताकि किसी शा...

Kya naam Jaap sa body ki negative urja duur nahi hogi

 हाँ, आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो सच्चे भाव, श्रद्धा और नियमितता के साथ किया गया नाम जाप मन, बुद्धि और चित्त को शुद्ध करने का एक शक्तिशाली साधन माना जाता है। जब व्यक्ति प्रेम और समर्पण से नाम का स्मरण करता है, तो उसके भीतर सकारात्मक चेतना बढ़ने लगती है। इससे भय, क्रोध, ईर्ष्या, तनाव और नकारात्मक विचार धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। कई संतों ने कहा है कि नाम की शक्ति आंतरिक अंधकार को दूर कर आत्मा को प्रकाश की ओर ले जाती है। यदि किसी को भारीपन, बेचैनी या नकारात्मक ऊर्जा जैसी अनुभूति होती है, तो नियमित नाम जाप, सात्विक जीवन, अच्छे कर्म और ईश्वर पर विश्वास उसके मन को स्थिर और शांत बनाने में सहायक हो सकते हैं। साथ ही, यदि मानसिक या शारीरिक समस्या लगातार बनी रहे, तो उसे केवल आध्यात्मिक कारण मानने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना भी आवश्यक है।