Guru ji ek dought hai sevan chakra mantra ucharan k samey sabhi mantro mein pet ander jana chahiye ja bahar ?

 आध्यात्मिक दृष्टि से मंत्र जप करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात सजगता, शुद्ध उच्चारण और एकाग्रता है, न कि पेट को जबरदस्ती अंदर या बाहर करना। सामान्यतः यदि मंत्र का उच्चारण स्वाभाविक रूप से किया जा रहा है, तो श्वास के साथ पेट की हलचल अपने आप होती रहती है। इसे नियंत्रित करने की आवश्यकता नहीं होती। यदि किसी विशेष साधना या गुरु ने अलग विधि बताई हो, तो उसी का पालन करना चाहिए। अन्यथा सातों चक्रों के मंत्रों का जप सहज श्वास के साथ करें। जब श्वास भीतर जाए तो पेट स्वाभाविक रूप से थोड़ा बाहर आता है और श्वास बाहर निकलते समय पेट हल्का भीतर जाता है। इसे कृत्रिम रूप से बदलने का प्रयास न करें। साधना में सहजता ही सबसे बड़ा नियम है। मन मंत्र में लीन रहे, श्वास स्वाभाविक रहे और चेतना भीतर की ओर केंद्रित रहे, तभी मंत्र जप का वास्तविक आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।

Meri third eye active ho gayi h kaise pata karenge ?

 आध्यात्मिक दृष्टि से तीसरी आँख (आज्ञा चक्र) सक्रिय हुई है या नहीं, इसका निर्णय केवल किसी एक अनुभव से नहीं किया जा सकता। केवल माथे पर दबाव, कंपन, गर्माहट, प्रकाश दिखना या ऊर्जा का अनुभव होना पर्याप्त प्रमाण नहीं माना जाता। वास्तविक सक्रियता का प्रभाव साधक के भीतर दिखाई देता है—जैसे मन पहले से अधिक शांत होना, एकाग्रता बढ़ना, विवेक का जागृत होना, ध्यान सहज लगना और आध्यात्मिक चेतना का गहरा होना। कई बार साधक को आंतरिक प्रकाश, सूक्ष्म अनुभूतियाँ या दिव्य संकेत भी मिल सकते हैं, लेकिन ये हर व्यक्ति में समान नहीं होते। इसलिए केवल अनुभवों के आधार पर निष्कर्ष न निकालें। यदि आपकी साधना से अहंकार कम हो रहा है, वैराग्य बढ़ रहा है और ईश्वर के प्रति प्रेम गहरा हो रहा है, तो यह अधिक महत्वपूर्ण संकेत हैं। तीसरी आँख का उद्देश्य चमत्कार नहीं, बल्कि चेतना का विस्तार और आत्मिक जागृति है। इसलिए नियमित साधना करते रहें और धैर्य बनाए रखें।

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