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mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

10 द्वार कहा है और ये कैसे खुलता है

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10 द्वार कहा है और ये कैसे खुलता है "10 द्वार" (10 gates) का संदर्भ योग और अध्यात्म में शरीर के महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों से है। यह अवधारणा मुख्य रूप से कुंडलिनी योग और ध्यान में आती है। ये 10 द्वार शरीर के 9 बाहरी द्वार और 1 आंतरिक द्वार को दर्शाते हैं। 9 बाहरी द्वार: 2 आंखें 2 कान 2 नासिका छिद्र 1 मुख 2 उत्सर्जन द्वार (मूत्र मार्ग और गुदा) 10वां द्वार (दशम द्वार): यह शरीर का सबसे महत्वपूर्ण आंतरिक द्वार है जिसे "सहस्रार" या "ब्रह्मरंध्र" कहा जाता है, जो सिर के ऊपर स्थित होता है। इसे आध्यात्मिक रूप से जागरण और मुक्ति का द्वार माना जाता है। कैसे खुलता है: दशम द्वार के खुलने का तात्पर्य कुंडलिनी शक्ति के जागरण से है, जो मूलाधार (Root Chakra) से शुरू होती है और सहस्रार (Crown Chakra) तक पहुँचती है। यह द्वार साधना, ध्यान, और कुंडलिनी योग के माध्यम से खोला जा सकता है। जब कुंडलिनी जागृत होती है और सहस्रार तक पहुँचती है, तो व्यक्ति को ब्रह्मांडीय चेतना और परमात्मा से एकता का अनुभव होता है। इस अवस्था में मन, शरीर, और आत्मा का संयोजन होता है और व्यक्ति आध्यात्...