10 द्वार कहा है और ये कैसे खुलता है

"10 द्वार" (10 gates) का संदर्भ योग और अध्यात्म में शरीर के महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों से है। यह अवधारणा मुख्य रूप से कुंडलिनी योग और ध्यान में आती है। ये 10 द्वार शरीर के 9 बाहरी द्वार और 1 आंतरिक द्वार को दर्शाते हैं।
9 बाहरी द्वार:
2 आंखें
2 कान
2 नासिका छिद्र
1 मुख
2 उत्सर्जन द्वार (मूत्र मार्ग और गुदा)
10वां द्वार (दशम द्वार):
यह शरीर का सबसे महत्वपूर्ण आंतरिक द्वार है जिसे "सहस्रार" या "ब्रह्मरंध्र" कहा जाता है, जो सिर के ऊपर स्थित होता है। इसे आध्यात्मिक रूप से जागरण और मुक्ति का द्वार माना जाता है।
कैसे खुलता है: दशम द्वार के खुलने का तात्पर्य कुंडलिनी शक्ति के जागरण से है, जो मूलाधार (Root Chakra) से शुरू होती है और सहस्रार (Crown Chakra) तक पहुँचती है। यह द्वार साधना, ध्यान, और कुंडलिनी योग के माध्यम से खोला जा सकता है। जब कुंडलिनी जागृत होती है और सहस्रार तक पहुँचती है, तो व्यक्ति को ब्रह्मांडीय चेतना और परमात्मा से एकता का अनुभव होता है।
इस अवस्था में मन, शरीर, और आत्मा का संयोजन होता है और व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से जागरूक होता है। ध्यान, मंत्र जप (जैसे "ओम नमः शिवाय"), और प्राणायाम के अभ्यास से इसे सक्रिय किया जा सकता है।
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