mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....

 मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है उसका रंग लाल होता है और उसके चारो और एक चक्र घूमता है इसका क्या अर्थ हो सकता है



जब आप दीये की लौ को एक मिनट देखते हैं और फिर आँखें बंद करते हैं, तो जो ज्योति आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है वह त्राटक साधना का परिणाम है। लाल रंग का दिखना आपकी प्राण ऊर्जा और मूलाधार शक्ति के जागरण का संकेत है। उसके चारों ओर घूमता हुआ चक्र दर्शाता है कि ऊर्जा धीरे-धीरे आपकी तीसरी आँख पर केंद्रित हो रही है। यह अनुभव बताता है कि आपका मन एकाग्र हो रहा है और चेतना सूक्ष्म स्तर पर प्रवेश कर रही है। इसे सकारात्मक संकेत मानें और नियमित अभ्यास से ध्यान और गहरा होता जाएगा।


Comments

  1. Dhyaan mein agni dikhna,jse ki angithi mein jalna ya choti choti ya badi lakdio se aag niklna or number b dikhna mharaj ji?

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