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mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

कुंडलिनी ध्यान के बाद शरीर में खुजली सी क्यों होती है

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  कुंडलिनी ध्यान के बाद शरीर में खुजली सी क्यों होती है ? कुंडलिनी ध्यान के बाद शरीर में खुजली या झुनझुनी जैसा महसूस होना एक सामान्य अनुभव है और इसका मुख्य कारण कुंडलिनी ऊर्जा का जागरण और शरीर में उसका प्रवाह है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं: 1. ऊर्जा प्रवाह का प्रभाव: कुंडलिनी ध्यान के दौरान, ऊर्जा (प्राण) हमारे शरीर की सूक्ष्म नाड़ियों और चक्रों में गति करती है। यदि शरीर में कुछ ऊर्जा अवरोध (blockages) हैं, तो यह ऊर्जा उन्हें साफ करने का प्रयास करती है। यह प्रक्रिया कभी-कभी शरीर में खुजली, झुनझुनी, गर्मी, या हल्की बेचैनी का कारण बन सकती है। 2. ऊर्जा अवरोध (Blockages): हमारे शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को नियंत्रित करने वाले नाड़ी तंत्र होते हैं, जैसे इड़ा, पिंगला, और सुषुम्ना। कुंडलिनी जागरण के दौरान, यदि किसी नाड़ी में अवरोध है, तो वहां खुजली या असामान्य संवेदनाएं हो सकती हैं। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आपका शरीर इन अवरोधों को दूर करने के लिए काम कर रहा है। 3. शारीरिक प्रतिक्रियाएं: ध्यान के दौरान रक्त संचार और न्यूरोलॉजिकल गतिविधियां बढ़ जाती हैं। मस्तिष्क और नसों में ऊर्...

कुण्डलनी जागरण

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  कुण्डलनी जागरण  कुण्डलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए साधक को नियमित और समर्पित साधना की आवश्यकता होती है। यह एक अत्यधिक शक्तिशाली और संवेदनशील प्रक्रिया होती है, जिसे उचित मार्गदर्शन के साथ करना महत्वपूर्ण है। यहां कुछ मुख्य विधियाँ और उपाय हैं जो कुण्डलिनी जागरण में सहायक हो सकते हैं: 1. यो ग और आसन: हठ योग: हठ योग के विभिन्न आसनों के माध्यम से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और कुण्डलिनी जागृति के लिए शरीर तैयार होता है। विशेष रूप से सर्वांगासन , शशांकासन , भुजंगासन , और शवासन महत्वपूर्ण माने जाते हैं। मूलबंध और अश्विनी मुद्रा : मूलाधार चक्र को सक्रिय करने के लिए ये मुद्राएं सहायक होती हैं। 2. प्राणायाम : कपालभाति और अनुलोम-विलोम प्राणायाम ऊर्जा को संतुलित करने और नाड़ियों (इडा, पिंगला, और सुषुम्ना) को शुद्ध करने में मदद करते हैं। भस्त्रिका प्राणायाम : यह प्राणायाम भी कुण्डलिनी ऊर्जा को ऊपर उठाने में सहायक होता है। 3. ध्यान और ध्यान विधियाँ : मूलाधार चक्र ध्यान : मूलाधार चक्र पर ध्यान केंद्रित करें, जो शरीर के आधार में स्थित होता है। यह ध्यान कुण्डलिनी शक्ति को जागृत...