Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

कुंडलिनी ध्यान के बाद शरीर में खुजली सी क्यों होती है

 कुंडलिनी ध्यान के बाद शरीर में खुजली सी क्यों होती है ?


कुंडलिनी ध्यान के बाद शरीर में खुजली या झुनझुनी जैसा महसूस होना एक सामान्य अनुभव है और इसका मुख्य कारण कुंडलिनी ऊर्जा का जागरण और शरीर में उसका प्रवाह है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:


1. ऊर्जा प्रवाह का प्रभाव:

  • कुंडलिनी ध्यान के दौरान, ऊर्जा (प्राण) हमारे शरीर की सूक्ष्म नाड़ियों और चक्रों में गति करती है।
  • यदि शरीर में कुछ ऊर्जा अवरोध (blockages) हैं, तो यह ऊर्जा उन्हें साफ करने का प्रयास करती है।
  • यह प्रक्रिया कभी-कभी शरीर में खुजली, झुनझुनी, गर्मी, या हल्की बेचैनी का कारण बन सकती है।

2. ऊर्जा अवरोध (Blockages):

  • हमारे शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को नियंत्रित करने वाले नाड़ी तंत्र होते हैं, जैसे इड़ा, पिंगला, और सुषुम्ना।
  • कुंडलिनी जागरण के दौरान, यदि किसी नाड़ी में अवरोध है, तो वहां खुजली या असामान्य संवेदनाएं हो सकती हैं।
  • यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आपका शरीर इन अवरोधों को दूर करने के लिए काम कर रहा है।

3. शारीरिक प्रतिक्रियाएं:

  • ध्यान के दौरान रक्त संचार और न्यूरोलॉजिकल गतिविधियां बढ़ जाती हैं।
  • मस्तिष्क और नसों में ऊर्जा के प्रवाह से संवेदनशीलता बढ़ जाती है, जिससे खुजली या झुनझुनी महसूस हो सकती है।
  • त्वचा भी अधिक संवेदनशील हो सकती है, खासकर यदि ध्यान के दौरान आप लंबे समय तक स्थिर बैठे रहें।

4. आध्यात्मिक दृष्टिकोण:

  • खुजली और झुनझुनी जैसी संवेदनाएं यह संकेत दे सकती हैं कि आपकी कुंडलिनी ऊर्जा जाग रही है और आपकी चेतना का विस्तार हो रहा है।
  • यह अनुभव ध्यान में गहराई लाने और चक्रों को सक्रिय करने का संकेत हो सकता है।

5. कैसे संभालें यह अनुभव?

  1. आराम करें:
    खुजली या झुनझुनी महसूस होने पर घबराएं नहीं। यह एक अस्थायी अनुभव है और धीरे-धीरे शांत हो जाएगा।
  2. श्वास पर ध्यान दें:
    गहरी और धीमी सांसें लें। इससे ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होगा और असुविधा कम होगी।
  3. शरीर को हिलाएं:
    ध्यान के बाद शरीर को थोड़ा स्ट्रेच करें या हल्का व्यायाम करें। इससे ऊर्जा का प्रवाह समान रूप से होगा।
  4. जल पिएं:
    ध्यान के बाद पानी पीने से शरीर को शांत और संतुलित किया जा सकता है।
  5. धैर्य रखें:
    यह अनुभव धीरे-धीरे कम हो जाएगा क्योंकि आपका शरीर और मन इस ऊर्जा के साथ सामंजस्य बैठा लेंगे।



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