dhayan lgate samay kuch samay bad muladhar se vishudhi chakkar ke bich tej khichav hota hai....
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dhayan lgate samay kuch samay bad muladhar se vishudhi chakkar ke bich tej khichav hota hai, jis se pet andar ki aur khich jata hai aur apne aap kafi der tak swash ruk jati, aur gale me ajib sa bahri pan mahsus hota hai, kripya marg darshan kre. ??
आध्यात्मिक दृष्टि से यदि ध्यान के दौरान मूलाधार से विशुद्धि चक्र तक खिंचाव, पेट का भीतर की ओर जाना, कुछ समय के लिए श्वास का स्वतः रुक जाना और गले में भारीपन महसूस होता है, तो कई साधना परंपराएँ इसे प्राणशक्ति के संतुलन या आंतरिक एकाग्रता की प्रक्रिया से जोड़कर देखती हैं। यदि यह अनुभव बिना किसी पीड़ा, घबराहट या तकलीफ़ के हो रहा है, तो इसे शांत भाव से देखें और इसके पीछे भागने या डरने की आवश्यकता नहीं है। ध्यान के समय शरीर को सहज रखें, श्वास को कभी भी जानबूझकर न रोकें और किसी अनुभव को लक्ष्य न बनाएं। नियमित नाम सिमरन, गुरु के बताए मार्ग और संतुलित जीवनचर्या पर ध्यान दें। यदि यह खिंचाव, सांस रुकने की स्थिति या गले का भारीपन अत्यधिक बढ़ जाए, घबराहट हो या दैनिक जीवन को प्रभावित करे, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य परामर्श लें, ताकि किसी शारीरिक कारण की भी जाँच हो सके।
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