mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

मुझे 2 साल हो गए जाप करते हुए शुरुआत में कर ही नहीं पाती थी उस समय मुझे झटके लगते थे नींद आती थी उल्टी आती थी उबासी

 मुझे 2 साल हो गए जाप करते हुए शुरुआत में कर ही नहीं पाती थी उस समय मुझे झटके लगते थे नींद आती थी उल्टी आती थी उबासी पूरे शरीर में अलग अलग तरह की चीज होती थी एक दिन मैंने चैनल पर देख कर मेडिटेशनकरना चाहा तो पहले दिन शरीर कागज की तरह हल्का हो गया लेकिन दो दिन बाद शरीर ठंड बढ़ने लग गया तो मैंने ध्यान छोड़ छोड़ दिया और मुझे फिर से पहलेकी तरह नेगेटिविटी परेशान करने लग गई मन में जप चलता है तो थोड़ा आराम मिलता है लेकिन माला लेकर करती हूं तो 5 मिनट बाद में ठंड बढ़ जाती है अपने आप शरीर में तो उसके लिए मार्गदर्शन करें करें करें 🙏🙏🙏 ???


आपने जो अनुभव साझा किए हैं, वे ध्यान साधना की प्रगति के दौरान होने वाली शारीरिक और मानसिक प्रतिक्रियाएं हैं। जब आप ध्यान में गहरे उतरते हैं, तो शरीर में ऊर्जा का प्रवाह होता है, जिससे झटके, उल्टी, उबासी, या ठंड जैसे अनुभव हो सकते हैं। यह शारीरिक और मानसिक अवरोधों को साफ करने की प्रक्रिया है।

शरीर की ठंडक का अनुभव नकारात्मकता के कारण हो सकता है। जब आप माला से ध्यान करती हैं, तो आप उस ऊर्जा से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं जो आपको शांत करने में मदद कर सकती है।

आपको एकाग्रता को बनाए रखने के लिए धीरे-धीरे और शांति से ध्यान करना चाहिए। शुरू में, माला के बजाय चुपचाप "ओं" या "हं" मंत्र का जप करें, जिससे शरीर को ठंडक का सामना न करना पड़े। ध्यान के बाद, शरीर को गर्म करने के लिए हलके व्यायाम करें और प्राणायाम का अभ्यास करें। नियमित रूप से स्फूर्तिदायक ऊर्जा के लिए अपने आंतरिक मनोबल को बनाए रखें।

शरीर में ठंडक का अनुभव आंतरिक अवरोधों को साफ करने का संकेत हो सकता है, लेकिन इसे नियंत्रण में रखने के लिए आपकी साधना निरंतर जारी रखनी चाहिए।

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