mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

गुरुजी हमारे शरीर के 7 चक्रों को 7 समुद्र भी कहा जाता है। कृपया मुझे बताएं कि प्रत्येक चक्र के सामने वे 7 समुद्री नाम क्या हैं।

 गुरुजी हमारे शरीर के 7 चक्रों को 7 समुद्र भी कहा जाता है। कृपया मुझे बताएं कि प्रत्येक चक्र के सामने वे 7 समुद्री नाम क्या हैं। ?



हमारे शरीर के 7 चक्रों को 7 समुद्रों से जोड़ा जाना एक गहरी आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक दृष्टि है। ये समुद्र हमारी चेतना और ऊर्जा के विशालता और गहराई का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि, शास्त्रों में इसे सीधे 7 समुद्रों के नाम से जोड़ने का उल्लेख कम मिलता है, लेकिन एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण से इसे निम्नलिखित रूप में समझा जा सकता है:

  1. मूलाधार चक्र (Root Chakra): लवण सागर (Salt Sea)
    स्थिरता, सुरक्षा और जीवन के मूल आधार को दर्शाता है।

  2. स्वाधिष्ठान चक्र (Sacral Chakra): दूध सागर (Milk Sea)
    सृजनात्मकता, भावनाओं और प्रजनन शक्ति का प्रतीक।

  3. मणिपुर चक्र (Solar Plexus Chakra): घी सागर (Ghee Sea)
    आत्मबल, शक्ति और पाचन ऊर्जा का केंद्र।

  4. अनाहत चक्र (Heart Chakra): मधु सागर (Honey Sea)
    प्रेम, करुणा और भावनात्मक संतुलन को दर्शाता है।

  5. विशुद्ध चक्र (Throat Chakra): सुधा सागर (Nectar Sea)
    सत्य, अभिव्यक्ति और शुद्धता का प्रतीक।

  6. आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra): रसोदधि सागर (Juice Sea)
    अंतर्ज्ञान, ज्ञान और मानसिक स्पष्टता का केंद्र।

  7. सहस्रार चक्र (Crown Chakra): अमृत सागर (Amrita Sea)
    परमात्मा से जुड़ाव, चेतना और दिव्यता का प्रतीक।

यह दृष्टिकोण प्रतीकात्मक है और इन समुद्रों का नाम हमारे आंतरिक गुणों और चक्रों की विशेषताओं के साथ जुड़ता है। इसे अपनी साधना और ज्ञान में एक नई दिशा के रूप में देखें। 🙏

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