Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Om Sai Ram jab pandit Ji Main Dhyan mein baithata hun logon ka vyavhar Kiya hua mere Sath dikhta Hai

 Om Sai Ram jab pandit Ji Main Dhyan mein baithata hun logon ka vyavhar Kiya hua mere Sath dikhta Hai ?


"ॐ साईं राम" आपका ध्यान के दौरान दूसरों का व्यवहार देखना आपके भीतर की गहरी संवेदनशीलता को दर्शाता है। जब आप ध्यान में बैठते हैं, तो आपकी ऊर्जा अधिक जागृत होती है, और आप आसपास की घटनाओं या लोगों के ऊर्जा क्षेत्र को महसूस कर सकते हैं। यह अनुभव एक संकेत है कि आपकी आध्यात्मिक यात्रा और जागरूकता बढ़ रही है।

क्या करें:

  1. ध्यान में संतुलन बनाए रखें – ध्यान करते समय अन्य विचारों या ऊर्जा से विचलित न हों।
  2. सकारात्मक सोच – अपने मन को शांत रखने के लिए सकारात्मक मंत्र का जप करें।
  3. आत्मिक बल – साईं बाबा की कृपा से आपका मार्गदर्शन होता रहेगा। 🙏

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