Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

After daily jaap meditation mujhe ab bht nend atti hai ho main meditation pe baith nhi pati pls reply...how i can improve....n why this is happening

 After daily jaap meditation mujhe ab bht nend atti hai ho main meditation pe baith nhi pati pls reply...how i can improve....n why this is happening ?


यह अत्यधिक नींद आना गहरी ऊर्जा परिवर्तन या थकान का संकेत हो सकता है। जब आप जप और ध्यान करते हैं, तो आपकी ऊर्जा भीतर की ओर केंद्रित होती है, जिससे शरीर और मन को गहरी शांति मिलती है। यदि शरीर पहले से थका हुआ है, तो ध्यान के बाद नींद आना स्वाभाविक है।

सुधार के लिए:

  1. ध्यान से पहले हल्का व्यायाम करें – शरीर को सक्रिय करें।
  2. स्नान करें या चेहरा धोएं – ताजगी महसूस होगी।
  3. बैठकर ध्यान करें – लेटने से बचें।
  4. आहार संतुलित रखें – भारी भोजन से नींद बढ़ सकती है।
  5. स्निग्धता (Tamas) कम करें – नियमित दिनचर्या बनाएं।

Comments

Popular posts from this blog

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....