mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

Guruji kya agar koi sone ke alawa(6 ghante) baaki saara samay(18 ghante) 2 saal tak 1 aasan par baithkar naam jap karta rahega to kya moksh prapti ke chances hain.?

 Guruji kya agar koi sone ke alawa(6 ghante) baaki saara samay(18 ghante) 2 saal tak 1 aasan par baithkar naam jap karta rahega to kya moksh prapti ke chances hain.?


यदि कोई साधक 18 घंटे प्रतिदिन, लगातार 2 वर्षों तक एक आसन पर बैठकर नाम जप करता है, तो यह निश्चित रूप से उसकी चेतना को गहरे आध्यात्मिक स्तर पर ले जा सकता है। लेकिन केवल जप की मात्रा से मोक्ष प्राप्ति की गारंटी नहीं होती। मोक्ष के लिए शुद्ध हृदय, अहंकार का पूर्ण त्याग, आत्मबोध, गुरु की कृपा और संपूर्ण समर्पण आवश्यक है।

यदि यह साधना निष्काम भाव, पूर्ण विश्वास और समर्पण के साथ की जाए, तो चित्त की शुद्धि होकर आत्मसाक्षात्कार संभव हो सकता है। सही मार्गदर्शन और आंतरिक अनुभव के आधार पर साधक को मोक्ष की दिशा में बढ़ने की संभावना होती है।

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