Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

mera doh savak he ki, jab bhi me meditation karti hu to muje muh me se pani or laar sa nikalta he he to woh kyu hota he? 2. Jab me chakras ka bij mantra karti hu to throat chakras pe aake aage nahi badh pati hu

 mera doh savak he ki, jab bhi me meditation karti hu to muje muh me se pani or laar sa nikalta he he to woh kyu hota he? 2. Jab me chakras ka bij mantra karti hu to throat chakras pe aake aage nahi badh pati hu?


  • जब आप ध्यान करती हैं और मुँह से पानी या लार निकलता है, तो यह एक सामान्य ऊर्जा शुद्धिकरण का संकेत हो सकता है। ध्यान के दौरान शरीर में शारीरिक और मानसिक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है, जिससे लार का प्रवाह बढ़ सकता है। यह शरीर के वातावरण से ऊर्जा संतुलन में सुधार करता है।

  • यदि आप चक्रों के बीज मंत्र का जाप करती हैं और गले के चक्र (विशुद्धि चक्र) पर अटक जाती हैं, तो यह रुकावटें या विरोधी भावनाओं के कारण हो सकता है। गले के चक्र में किसी प्रकार का संकोच या असंयम हो सकता है। आप गले की शुद्धि के लिए धीमे-धीमे प्राणायाम और मौन ध्यान का अभ्यास करें।

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