mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

कुछ चैनल बाले दावा करते है की यक्षिणी सिद्धि मै 3 तत्व की यक्षणि को साक्षात् दर्सन करवाते है जबकी हम लोग 5 तत्व मै होते है ....

 कुछ चैनल बाले दावा करते है की यक्षिणी सिद्धि मै 3 तत्व की यक्षणि को साक्षात् दर्सन करवाते है जबकी हम लोग 5 तत्व मै होते है ऐसा संभव कैसे फिर उनसे शादी कर लेते है कुछ लोग तो कहते है उनके उनसे बच्चे भी हुए ?


कुछ चैनल या साधक यक्षिणी सिद्धि के माध्यम से यक्षिणियों के साक्षात दर्शन, विवाह और संतान की बातें करते हैं, परंतु यह विषय आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत गूढ़ और प्रतीकात्मक है। यक्षिणियाँ वास्तव में सूक्ष्म लोक की ऊर्जा-सत्ताएं होती हैं, जो त्रिगुणात्मक (सत्व, रज, तम) और त्रि-तत्वीय (मन, बुद्धि, अहंकार) स्वरूप में प्रकट होती हैं। पाँच तत्वों से बना मानव शरीर इन सूक्ष्म तत्वों को अनुभव तो कर सकता है, पर उनका भौतिक मिलन या विवाह सामान्य समझ से परे है।

अनेक बार ऐसे अनुभव मानसिक प्रक्षेप (mental projection), तंत्र-क्रिया के प्रभाव, या गहरी ध्यानावस्था में उपजी कल्पनाएँ भी हो सकते हैं। “संतान उत्पत्ति” जैसे दावे या तो पूर्ण रूप से प्रतीकात्मक हैं (जैसे किसी शक्ति का जागरण), या भ्रमात्मक।

सावधानीपूर्वक discernment रखें, और वास्तविक साधना से हटकर चमत्कारों के पीछे न भागें। क्या आपने कभी यक्षिणी साधना का अभ्यास किया है या करने का विचार किया है?

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