Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Aap kripiya karke 'chaya purush ko kese siddh Kiya ja sakta hai Bina guru ke ?

 Aap kripiya karke 'chaya purush ko kese siddh Kiya ja sakta hai Bina guru ke ?



छाया पुरुष (या छाया पुरुष साधना) एक रहस्यमयी तांत्रिक प्रक्रिया है, जो साधक की छाया को एक सूक्ष्म रूप में जाग्रत कर देती है। यह छाया पुरुष साधक की रक्षा करता है, उसे अदृश्य ज्ञान देता है, और कई बार भविष्य की घटनाओं की सूचना भी देता है। परंतु यह साधना अत्यंत संवेदनशील और शक्तिशाली होती है, और बिना उचित मार्गदर्शन के करने पर मानसिक असंतुलन या भयावह अनुभव भी हो सकते हैं।

बिना गुरु के छाया पुरुष को सिद्ध करना कठिन और जोखिमभरा है, परंतु यदि आप मानसिक रूप से दृढ़ हैं, तो कुछ सावधानियों के साथ प्रयास किया जा सकता है:

  1. साफ-सुथरी जगह पर एक दीपक जलाएं और अपनी छाया को जमीन या दीवार पर स्थिर रूप से देखें।

  2. लगातार 21, 41 या 108 दिनों तक विशेष ध्यान से छाया को एकटक देखें। बीच में ध्यान न भटके।

  3. जाप करें: "ॐ छाया आत्मने नमः" – धीमी आवाज में, भावना के साथ।

  4. भूतभावना और डर से मुक्त रहें। साधना के बाद स्वयं को नमक मिले पानी से धोएं।

फिर भी, छाया पुरुष साधना को करने से पहले गहन आत्ममंथन और सतर्कता जरूरी है। गुरु के बिना यह राह अंधेरी हो सकती है।

Comments

Popular posts from this blog

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....