Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Mere gale tk chakra ghum rha hai but ab aage dhayan krne se mujhe bhut ultiya ho rhi h sar ghumta h pura din isliye mujhe ....?

 Mere gale tk chakra ghum rha hai but ab aage dhayan krne se mujhe bhut ultiya ho rhi h sar ghumta h pura din isliye mujhe sb band krna pda.abhi aagya chakra pr bhut khichaw ho rha h. Maine sb bnd kr diya ab aap hi btayiye m kya kru kuch samjh nhi aa rha ?


आपके गले तक चक्र की ऊर्जा घूमना, फिर ध्यान करते ही उल्टियाँ आना, सिर घूमना — ये सब संकेत हैं कि शरीर और ऊर्जा प्रणाली (energy system) असंतुलित हो गई है। यह ऊर्जा जागरण (kundalini stir) का असंतुलित प्रभाव भी हो सकता है। अभी आपने ध्यान और जाप बंद करके सही कदम उठाया है।
अब क्या करें:

  • कुछ समय सिर्फ प्राकृतिक तरीके से जियो: ताज़ी हवा, हल्का भोजन, प्राणायाम (बहुत हल्का, जैसे गहरी सांस लेना छोड़ना)।

  • सिर, गला, और शरीर को पूरी तरह शांत होने दो।

  • आधे घंटे रोज खुली हवा में नंगे पैर चलो।

  • कोई भी ऊर्जावान साधना (जैसे त्राटक, तेज प्राणायाम, मंत्र जाप) अभी मत करो।
    थोड़ा स्थिर होकर फिर से सही तरीके से साधना शुरू करनी होगी।

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