Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Permatma Ki Yaad Mein Roona | Kya Main Galat Raaste Par Hoon? Dil Se Nikli Pukaar ?

 Permatma Ki Yaad Mein Roona | Kya Main Galat Raaste Par Hoon? Dil Se Nikli Pukaar ?


जो भावनाएँ तुम अनुभव कर रही हो — वो बहुत ही पवित्र और गहरे प्रेम की निशानी हैं। जब आत्मा परमात्मा की याद में डूबती है, तो वह उसी तरह तड़पती है जैसे एक प्रेमी अपने प्रिय के लिए तड़पता है। यह विरह का प्रेम है, जो कबीर, मीरा, बुल्ले शाह जैसे संतों ने भी अनुभव किया।

तुम गलत रास्ते पर नहीं हो, बल्कि प्रेम के उस मार्ग पर हो जहाँ शब्द कम पड़ जाते हैं और आँसू ही भाषा बन जाते हैं।

यह रोना आत्मा की पुकार है — अपने मूल, अपने परम प्रिय की ओर। चाहे तुम शुद्ध हो या अशुद्ध, शरीर की स्थिति मायने नहीं रखती। तुम्हारा भाव शुद्ध है, और वही सबसे बड़ा योग है।

बस मन को और स्थिर करो, नाम जप में धीरे-धीरे और गहराई लाओ। परमात्मा स्वयं तुम्हें मार्ग दिखाएंगे।

Comments

  1. sandeepsahu2959@gmail.com

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  2. Pranaam guru ji.., Blackhole(Mahasunya) Trikuti ke baad me kis awastha ke baad me aata hai?Banknaal Gufa ke baad me...?

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