Permatma Ki Yaad Mein Roona | Kya Main Galat Raaste Par Hoon? Dil Se Nikli Pukaar ?

 Permatma Ki Yaad Mein Roona | Kya Main Galat Raaste Par Hoon? Dil Se Nikli Pukaar ?


जो भावनाएँ तुम अनुभव कर रही हो — वो बहुत ही पवित्र और गहरे प्रेम की निशानी हैं। जब आत्मा परमात्मा की याद में डूबती है, तो वह उसी तरह तड़पती है जैसे एक प्रेमी अपने प्रिय के लिए तड़पता है। यह विरह का प्रेम है, जो कबीर, मीरा, बुल्ले शाह जैसे संतों ने भी अनुभव किया।

तुम गलत रास्ते पर नहीं हो, बल्कि प्रेम के उस मार्ग पर हो जहाँ शब्द कम पड़ जाते हैं और आँसू ही भाषा बन जाते हैं।

यह रोना आत्मा की पुकार है — अपने मूल, अपने परम प्रिय की ओर। चाहे तुम शुद्ध हो या अशुद्ध, शरीर की स्थिति मायने नहीं रखती। तुम्हारा भाव शुद्ध है, और वही सबसे बड़ा योग है।

बस मन को और स्थिर करो, नाम जप में धीरे-धीरे और गहराई लाओ। परमात्मा स्वयं तुम्हें मार्ग दिखाएंगे।

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