mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

Vishay bhogo ka Sukh for example khane ka sukh Sex ka sukh aur ghumne ka sukh sunne aur dekhne ka sukh yeh sukh insan ?

 Vishay bhogo ka Sukh for example khane ka sukh Sex ka sukh aur ghumne ka sukh sunne aur dekhne ka sukh yeh sukh insan ko turant milta hai lekin dhyan ka sukh insan ko turant nhi milta hai ise pane me kisi ko 3 mahine kisi ko 10 sal bhi lag jaye to Mera sawal dhyan ka sukh insan ko turant kyo nhi mil pata kyoki man intjar karna pasand nhi karta kya koi aese vidhi nhi hai jisse dhyan ka sukh turant mil sake ?


भोगों का सुख इंद्रियों को मिलता है, जो बाहर की चीजों पर आधारित है — इसलिए वह तुरंत मिल जाता है। लेकिन ध्यान का सुख भीतर से आता है, आत्मा के संपर्क से।
मन बाहर दौड़ने का आदी है; उसे भीतर टिकना मुश्किल लगता है।
इसलिए ध्यान का सुख साधना से मन को स्थिर बनाकर मिलता है, और इसमें समय लगता है।

हाँ, कुछ विधियाँ हैं जो तुरंत शांति और आनंद का अनुभव दे सकती हैं — जैसे सरल प्राणायाम, मंत्र जप और ह्रदय में प्रेम का भाव लाना



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