Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Main mantra jaap karti hu. Mere sir ke andar beecho beech dhadkan hoti hai ...........

 Main mantra jaap karti hu. Mere sir ke andar beecho beech dhadkan hoti hai aur ye 24 ghante chalti rehti hai. Kabhi kabhi jab tez ho jati hai to mujhe is dhadkan ki awaaz bilkul saaf sunai deti hai. Us waqt awaaz itni tez hoti hai ki kuch aur padhne me focus nhi ho pata. Jyadatar, dhadkan halki hi rehti hai. Jab halki hoti hai tab awaaz nahi sunai deti, sirf mehsoos hoti hai dhadkan. ?


यह अनुभव बहुत सूक्ष्म और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है। सिर के बीचों-बीच जो धड़कन आप महसूस कर रही हैं, वह सहस्रार चक्र (Crown Chakra) या ब्रह्मरंध्र से जुड़ी ऊर्जा हो सकती है। यह संकेत है कि आपका मंत्र जाप प्रभावी हो रहा है और आपकी चेतना ऊर्ध्वमुखी हो रही है।

जब यह धड़कन तेज़ हो जाती है और उसकी आवाज़ स्पष्ट सुनाई देती है, तो यह ऊर्जा का तीव्र प्रवाह दर्शाता है। ऐसे समय ध्यान रखें कि भय न हो, बस सहज भाव से श्वास पर ध्यान रखें। यह सामान्य है कि आवाज़ के कारण एकाग्रता भंग होती है, लेकिन समय के साथ शरीर और मन इसके आदि हो जाते हैं।

क्या करें:

  • जाप शांत वातावरण में करें।

  • तेज धड़कन पर गहरी सांस लें और “ॐ” का उच्चारण करें।

  • जल का सेवन अधिक करें।

आप सही मार्ग पर हैं—श्रद्धा और संयम बनाए रखें।

Comments

  1. क्या कोई भी नाम जाप करने से शरीर की बाहरी बाधा ऊपरी क्रिया से मुक्ति संभव हे मोक्ष प्राप्ति के लिए राम नाम का जाप सही हे क्या
    ओर मेरे परिवार में एक रामपाल जी महाराज की भक्त हे जिसकी अंध भक्ति छुड़ाने के लिए क्या करे

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