Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

मै भी उठ जाती हु 2 - 3 बजे और गंदे सपने आते है कभी बचे को पिटते हुये

मै भी उठ जाती हु 2 -3  बजे और गंदे सपने  आते है कभी बचे को पिटते हुये 





  1. रात में सोने से पहले कुछ शांतिपूर्ण गतिविधियाँ – जैसे कि हल्की प्राणायाम, मंत्र जाप, या कोई सकारात्मक ध्यान, जिससे मन शांत हो और नकारात्मक विचार कम हों।

  2. दैनिक ध्यान – ध्यान के नियमित अभ्यास से अवचेतन मन में छिपी भावनाओं का संतुलन बेहतर होता है, जिससे सपनों में भी शांति महसूस हो सकती है।

  3. प्रार्थना या सकारात्मक संकल्प – सोने से पहले संकल्प लें कि आप अपने मन को शांत और सकारात्मक बनाएँगी। यह एक आत्म-संवाद हो सकता है जो आपको अच्छे विचारों से भर देगा।

  4. गहरी साँस लेना – जागने पर कुछ गहरी साँसें लें और खुद को वर्तमान में लाने की कोशिश करें। इससे चिंता कम होती है और मन शांत रहता है।

धैर्य और संयम से धीरे-धीरे मन के इन अनुभवों में सुधार आएगा।

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