mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

मेने सहस्त्र चक्र पर ज्यादा ध्यान करने पर सर में अजीब तरह खिंचव हो रहा हे

 मेने सहस्त्र चक्र पर ज्यादा ध्यान करने पर सर में अजीब तरह खिंचव हो रहा हे मुझे ध्यान छोड़ ना पड़ गया करना चाहता हु लेकिन डर सा लगता हे ऐसा लगता हे ऊर्जा दिर के ऊपर की तरफ जा रही हे ऐसा महान होता हे 3 हफते से नहीं कर रहा हूँ


सहस्रार चक्र पर ध्यान केंद्रित करने से सिर में खिंचाव या दबाव महसूस होना सामान्य अनुभव हो सकता है, खासकर जब यह चक्र सक्रिय हो रहा होता है। सहस्रार चक्र से जुड़ी ऊर्जा हमारी चेतना के उच्चतम स्तर की ओर ले जाती है, जो कई बार अचानक और तीव्रता से महसूस होती है। इस खिंचाव या ऊर्जा के ऊपर की ओर बढ़ने का अनुभव भय उत्पन्न कर सकता है, खासकर जब हम इसके आदी नहीं होते।

कुछ सुझाव हैं जो आपके लिए सहायक हो सकते हैं:

  1. जड़ (मूलाधार) चक्र पर ध्यान – सहस्रार चक्र पर ध्यान करने से पहले मूलाधार चक्र (Root Chakra) पर ध्यान दें। यह आपको अधिक स्थिरता और सुरक्षा का अहसास दिलाएगा। जड़ चक्र पर ध्यान केंद्रित करने से ऊर्जा का प्रवाह संतुलित हो जाता है, जिससे सहस्रार चक्र पर ध्यान करने में सहजता होगी।

  2. धीरे-धीरे अभ्यास – सहस्रार चक्र पर अचानक से अधिक समय तक ध्यान करने के बजाय, इसे धीरे-धीरे बढ़ाएँ। शुरुआत में कुछ मिनट का समय देकर धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएँ।

  3. दीप श्वास – ध्यान के दौरान गहरी साँसें लें। इससे मन शांत रहेगा, और ऊर्जा का प्रवाह भी नियंत्रित रहेगा।

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