Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

कृप्या मुझे कुछ समय पहले ऐसा लगता था कि मेरे 1 फुट ऊपर तक मेरी ऊर्जा जा रही है ऐसा क्यों सुबह सुबह लगता था जैसे मेरे पूरे बाल एक साथ कोई खींच रहा हो दर्द नहीं होता लेकिन ऐसा लगता था कारण बताऐं

 कृप्या मुझे कुछ समय पहले ऐसा लगता था कि मेरे 1 फुट ऊपर तक मेरी ऊर्जा जा रही है ऐसा क्यों सुबह सुबह लगता था जैसे मेरे पूरे बाल एक साथ कोई खींच रहा हो दर्द नहीं होता लेकिन ऐसा लगता था कारण बताऐं?



यह अनुभव आपकी ऊर्जा प्रणाली और ध्यान की प्रगति से संबंधित हो सकता है। जो आप महसूस कर रहे थे, वह सहस्रार चक्र (क्राउन चक्र) की सक्रियता या ऊर्जा जागरण का संकेत हो सकता है। जब सहस्रार चक्र सक्रिय होता है, तो व्यक्ति को सिर के ऊपर ऊर्जा का प्रवाह या खिंचाव जैसा अनुभव हो सकता है।

इसका कारण:

  1. ऊर्जा का ऊपर की ओर प्रवाह:

    • ध्यान, त्राटक, या प्राणायाम के अभ्यास से कुंडलिनी ऊर्जा जागृत होकर सहस्रार चक्र की ओर बढ़ने लगती है।
    • यह अनुभव ऊर्जा के सूक्ष्म स्तर पर आपकी चेतना के विस्तार का प्रतीक हो सकता है।
  2. सहस्रार चक्र की संवेदनशीलता:

    • सहस्रार चक्र सिर के ऊपरी भाग में होता है, और जब यह सक्रिय होता है, तो खिंचाव, कंपन, या दबाव जैसा अनुभव हो सकता है।
  3. ऊर्जा असंतुलन या बढ़ी संवेदनशीलता:

    • जब शरीर में ऊर्जा का संतुलन पूरी तरह स्थिर नहीं होता, तब यह अनुभव हो सकता है।
  4. आध्यात्मिक जागरूकता का संकेत:

    • यह संकेत हो सकता है कि आप गहराई से अपने भीतर के अनुभवों और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ जुड़ रहे हैं।

उपाय और संतुलन के लिए सुझाव:

1. प्राणायाम और ध्यान:

  • अनुलोम-विलोम प्राणायाम: ऊर्जा को संतुलित करता है।
  • भ्रामरी प्राणायाम: सहस्रार चक्र में शांति और स्थिरता लाता है।

2. ग्राउंडिंग अभ्यास:

  • ऊर्जा को संतुलित करने के लिए "ग्राउंडिंग" बहुत महत्वपूर्ण है।
  • ध्यान के बाद जमीन पर नंगे पैर चलें।
  • वृक्षासन और ताड़ासन जैसे योगासन करें।

3. सिर और शरीर को आराम दें:

  • यदि खिंचाव अधिक महसूस हो, तो सिर और गर्दन की हल्की मालिश करें।
  • ध्यान से पहले या बाद में शवासन करें।

4. आहार संतुलन:

  • सत्विक और पौष्टिक आहार लें।
  • पर्याप्त पानी पिएं और ठंडी तासीर वाले पदार्थों का सेवन करें।

5. सहस्रार चक्र पर ध्यान केंद्रित न करें:

  • शुरुआत में ध्यान को मणिपुर, अनाहत, या मूलाधार चक्र पर केंद्रित करें।
  • जब ऊर्जा संतुलित हो जाएगी, तो सहस्रार चक्र के अनुभव स्वाभाविक रूप से शांत हो जाएंगे।

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