guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

Guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green colour second time ke liye aata hai fir kuch nhi dikh rha पहले तीसरी आंख में नीले रंग की स्क्रीन दिखना शांति, गहराई और आध्यात्मिक सुरक्षा का संकेत था। अब बीच-बीच में हरे रंग का आना दर्शाता है कि आपकी साधना की ऊर्जा हीलिंग, संतुलन और हृदय चक्र से जुड़ाव की ओर बढ़ रही है। यह रंग परिवर्तन सामान्य है और साधना के विभिन्न चरणों में होता है। कुछ समय तक रंग न दिखना भी संकेत है कि चेतना आंतरिक स्थिरता ले रही है और मन को विश्राम चाहिए। इसे रुकावट न समझें, बल्कि अभ्यास जारी रखें। धैर्य और नामजप से आगे और गहरे अनुभव होंगे।

मुझे कल झटके लगे 7, एक साथ ओर मुझे फेर बैगनी रंग दिखाई दिया फेर मुझे हरा रंग दिखाई दिया फेर काला हो गया सब ।अगली क्रिया किया होगी आप बता सकते हे?

 मुझे कल झटके लगे 7, एक साथ ओर मुझे फेर बैगनी रंग दिखाई दिया फेर मुझे हरा रंग दिखाई दिया फेर काला  हो गया सब ।अगली क्रिया किया होगी आप बता सकते हे?

I got 7 shocks yesterday, all at once and I saw purple color again, then I saw green color and then everything went black. You can tell what was the next action.?




आपके अनुभव ध्यान और ऊर्जा के प्रवाह से जुड़े लगते हैं। झटके (jerks) ध्यान के दौरान ऊर्जा के प्रवाह में बदलाव या कुंडलिनी जागरण के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। बैंगनी, हरा, और काला रंग भी ध्यान में ऊर्जा और चेतना के विभिन्न स्तरों को दर्शाते हैं। आइए इसे थोड़ा और गहराई से समझते हैं:

अनुभव का विश्लेषण:

  1. झटके लगना (Jerks):

    • यह ऊर्जा के अचानक प्रवाह का संकेत हो सकता है। यदि आप कुंडलिनी साधना कर रहे हैं, तो यह जागरण की ओर इशारा कर सकता है। यह प्राकृतिक है, लेकिन इसे धीरे-धीरे और सावधानीपूर्वक अनुभव करना चाहिए।
    • यह भी हो सकता है कि शरीर का कोई ब्लॉक (अवरोध) ऊर्जा के प्रवाह में बाधा डाल रहा हो।
  2. बैंगनी रंग:

    • यह आमतौर पर आज्ञा चक्र (तीसरा नेत्र) के सक्रिय होने का संकेत देता है। यह आध्यात्मिक जागरूकता और अंतर्ज्ञान से जुड़ा है।
  3. हरा रंग:

    • यह अनाहत चक्र (हृदय चक्र) का संकेत हो सकता है। यह प्रेम, करुणा, और संतुलन का प्रतीक है।
  4. काला रंग:

    • यह ध्यान में गहराई या शून्यता का अनुभव हो सकता है। काला रंग अक्सर सब कुछ समाप्त कर एक नई शुरुआत का प्रतीक होता है।

अगली क्रिया क्या हो सकती है?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस प्रकार का अभ्यास कर रहे हैं। लेकिन सामान्यतः, इस प्रकार की ऊर्जा को नियंत्रित और संतुलित करना आवश्यक होता है। इसके लिए:

  1. श्वास पर ध्यान दें:
    • धीरे-धीरे और गहरी सांस लें। यह ऊर्जा को संतुलित करेगा।
  2. मूलाधार चक्र पर ध्यान दें:
    • यदि आप झटकों या तीव्र ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं, तो अपनी ऊर्जा को स्थिर करने के लिए मूलाधार चक्र पर ध्यान केंद्रित करें।
  3. नियमित अभ्यास:
    • ध्यान के बाद शांत बैठें और अपनी ऊर्जा को संतुलित करने का प्रयास करें।
  4. प्राणायाम:
    • नाड़ी शोधन प्राणायाम (alternate nostril breathing) का अभ्यास करें। यह ऊर्जा को संतुलित करने में सहायक होता है।

Comments

Popular posts from this blog

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

Main mantra jaap karti hu. Mere sir ke andar beecho beech dhadkan hoti hai ...........