mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

गुरुजी क्या कोई साधक की ऊर्जा अगर सहस्रार पर हो वो अपनी पत्नी या बच्चों के साथ लेता हो और उसका हाथ उनको टच हो रहा हो तो क्या उनको भी हल्का झटका लगता है

 गुरुजी क्या कोई साधक की ऊर्जा अगर सहस्रार पर हो वो अपनी पत्नी या बच्चों के साथ लेता हो और उसका हाथ उनको टच हो रहा हो तो क्या उनको भी हल्का झटका लगता है

Guruji, if a seeker's energy is on Sahasrara, he takes it with his wife or children and his hand touches them, do they also get a slight shock?

हाँ, ऐसा हो सकता है। जब किसी साधक की ऊर्जा सहस्रार या ऊपरी चक्रों पर सक्रिय होती है, तो उसके शरीर से एक प्रकार की ऊर्जा या वाइब्रेशन का प्रवाह होता है। यदि साधक का स्पर्श किसी दूसरे व्यक्ति को होता है, विशेषकर अपने करीबी जैसे पत्नी या बच्चों को, तो वे भी इस ऊर्जा को महसूस कर सकते हैं।

यह हल्का झटका या कंपन इस बात पर निर्भर करता है:

  1. साधक की ऊर्जा का स्तर: साधक की ऊर्जा जितनी प्रबल होगी, प्रभाव उतना अधिक महसूस हो सकता है।
  2. दूसरे व्यक्ति की संवेदनशीलता: कुछ लोग ऊर्जा के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं और उन्हें यह कंपन या झटका अधिक स्पष्ट रूप से महसूस हो सकता है।
  3. संपर्क का प्रकार: यदि संपर्क लंबे समय तक या अधिक गहराई से हो, तो ऊर्जा का प्रवाह अधिक प्रभावी हो सकता है।

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