guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

Guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green colour second time ke liye aata hai fir kuch nhi dikh rha पहले तीसरी आंख में नीले रंग की स्क्रीन दिखना शांति, गहराई और आध्यात्मिक सुरक्षा का संकेत था। अब बीच-बीच में हरे रंग का आना दर्शाता है कि आपकी साधना की ऊर्जा हीलिंग, संतुलन और हृदय चक्र से जुड़ाव की ओर बढ़ रही है। यह रंग परिवर्तन सामान्य है और साधना के विभिन्न चरणों में होता है। कुछ समय तक रंग न दिखना भी संकेत है कि चेतना आंतरिक स्थिरता ले रही है और मन को विश्राम चाहिए। इसे रुकावट न समझें, बल्कि अभ्यास जारी रखें। धैर्य और नामजप से आगे और गहरे अनुभव होंगे।

गुरुजी क्या कोई साधक की ऊर्जा अगर सहस्रार पर हो वो अपनी पत्नी या बच्चों के साथ लेता हो और उसका हाथ उनको टच हो रहा हो तो क्या उनको भी हल्का झटका लगता है

 गुरुजी क्या कोई साधक की ऊर्जा अगर सहस्रार पर हो वो अपनी पत्नी या बच्चों के साथ लेता हो और उसका हाथ उनको टच हो रहा हो तो क्या उनको भी हल्का झटका लगता है

Guruji, if a seeker's energy is on Sahasrara, he takes it with his wife or children and his hand touches them, do they also get a slight shock?

हाँ, ऐसा हो सकता है। जब किसी साधक की ऊर्जा सहस्रार या ऊपरी चक्रों पर सक्रिय होती है, तो उसके शरीर से एक प्रकार की ऊर्जा या वाइब्रेशन का प्रवाह होता है। यदि साधक का स्पर्श किसी दूसरे व्यक्ति को होता है, विशेषकर अपने करीबी जैसे पत्नी या बच्चों को, तो वे भी इस ऊर्जा को महसूस कर सकते हैं।

यह हल्का झटका या कंपन इस बात पर निर्भर करता है:

  1. साधक की ऊर्जा का स्तर: साधक की ऊर्जा जितनी प्रबल होगी, प्रभाव उतना अधिक महसूस हो सकता है।
  2. दूसरे व्यक्ति की संवेदनशीलता: कुछ लोग ऊर्जा के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं और उन्हें यह कंपन या झटका अधिक स्पष्ट रूप से महसूस हो सकता है।
  3. संपर्क का प्रकार: यदि संपर्क लंबे समय तक या अधिक गहराई से हो, तो ऊर्जा का प्रवाह अधिक प्रभावी हो सकता है।

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