guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

Guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green colour second time ke liye aata hai fir kuch nhi dikh rha पहले तीसरी आंख में नीले रंग की स्क्रीन दिखना शांति, गहराई और आध्यात्मिक सुरक्षा का संकेत था। अब बीच-बीच में हरे रंग का आना दर्शाता है कि आपकी साधना की ऊर्जा हीलिंग, संतुलन और हृदय चक्र से जुड़ाव की ओर बढ़ रही है। यह रंग परिवर्तन सामान्य है और साधना के विभिन्न चरणों में होता है। कुछ समय तक रंग न दिखना भी संकेत है कि चेतना आंतरिक स्थिरता ले रही है और मन को विश्राम चाहिए। इसे रुकावट न समझें, बल्कि अभ्यास जारी रखें। धैर्य और नामजप से आगे और गहरे अनुभव होंगे।

आंख बंद करने के बाद ऐसा लगता है आंख के बीच में कोई रोशनी उजाला हो तेज रोशनी रहती है पूरी लाइट बंद करने के बाद भी दोनो आँखो के

 आंख बंद करने के बाद ऐसा लगता है आंख के बीच में कोई रोशनी उजाला हो तेज रोशनी रहती है पूरी लाइट बंद करने के बाद भी दोनो आँखो के 

After closing the eyes it seems as if there is a bright light in the middle of the eye. 

Even after turning off the lights, the light still remains between the two eyes.

यह ध्यान (मेडिटेशन) या आत्मसाक्षात्कार के दौरान होने वाले अनुभवों में से एक हो सकता है।

संभावित कारण:

  1. अज्ञा चक्र (तीसरा नेत्र) का सक्रिय होना:
    यह अनुभव अक्सर अज्ञा चक्र के सक्रिय होने या उस पर ध्यान केंद्रित करने से होता है। अज्ञा चक्र के जागृत होने पर आंखों के बीच तेज रोशनी, रंग, या ऊर्जा का अनुभव होता है।

  2. आंतरिक चेतना का जागरण:
    यह संकेत हो सकता है कि आपकी आंतरिक चेतना जागृत हो रही है और आप अपनी साधना में गहराई तक जा रहे हैं।

  3. ध्यान के दौरान ऊर्जा का प्रवाह:
    यदि आप ध्यान करते हैं, तो यह रोशनी ऊर्जा प्रवाह का परिणाम हो सकती है, जो आपकी आंखों के बीच केंद्रित हो रही है।

  4. दृष्टि भ्रम या नेत्र तंत्रिका का प्रभाव:
    यदि यह अनुभव लगातार होता है, तो यह आंखों की तंत्रिकाओं की प्रतिक्रिया भी हो सकता है।

क्या करें:

  1. ध्यान जारी रखें:
    इस अनुभव को स्वाभाविक रूप से स्वीकार करें और अपनी साधना जारी रखें। यह संकेत हो सकता है कि आप सही दिशा में बढ़ रहे हैं।

  2. सहज रहें:
    जब यह अनुभव हो, तो घबराएं नहीं। गहरी सांस लें और मन को शांत रखें।


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