Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

आंख बंद करने के बाद ऐसा लगता है आंख के बीच में कोई रोशनी उजाला हो तेज रोशनी रहती है पूरी लाइट बंद करने के बाद भी दोनो आँखो के

 आंख बंद करने के बाद ऐसा लगता है आंख के बीच में कोई रोशनी उजाला हो तेज रोशनी रहती है पूरी लाइट बंद करने के बाद भी दोनो आँखो के 

After closing the eyes it seems as if there is a bright light in the middle of the eye. 

Even after turning off the lights, the light still remains between the two eyes.

यह ध्यान (मेडिटेशन) या आत्मसाक्षात्कार के दौरान होने वाले अनुभवों में से एक हो सकता है।

संभावित कारण:

  1. अज्ञा चक्र (तीसरा नेत्र) का सक्रिय होना:
    यह अनुभव अक्सर अज्ञा चक्र के सक्रिय होने या उस पर ध्यान केंद्रित करने से होता है। अज्ञा चक्र के जागृत होने पर आंखों के बीच तेज रोशनी, रंग, या ऊर्जा का अनुभव होता है।

  2. आंतरिक चेतना का जागरण:
    यह संकेत हो सकता है कि आपकी आंतरिक चेतना जागृत हो रही है और आप अपनी साधना में गहराई तक जा रहे हैं।

  3. ध्यान के दौरान ऊर्जा का प्रवाह:
    यदि आप ध्यान करते हैं, तो यह रोशनी ऊर्जा प्रवाह का परिणाम हो सकती है, जो आपकी आंखों के बीच केंद्रित हो रही है।

  4. दृष्टि भ्रम या नेत्र तंत्रिका का प्रभाव:
    यदि यह अनुभव लगातार होता है, तो यह आंखों की तंत्रिकाओं की प्रतिक्रिया भी हो सकता है।

क्या करें:

  1. ध्यान जारी रखें:
    इस अनुभव को स्वाभाविक रूप से स्वीकार करें और अपनी साधना जारी रखें। यह संकेत हो सकता है कि आप सही दिशा में बढ़ रहे हैं।

  2. सहज रहें:
    जब यह अनुभव हो, तो घबराएं नहीं। गहरी सांस लें और मन को शांत रखें।


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