mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

मंत्र जाप में बार बार घड़ी का दिखाना इसका मतलब क्या है

 मंत्र जाप में बार बार घड़ी का दिखाना इसका मतलब क्या है?

What is the meaning of repeatedly showing clock while chanting mantra?

मंत्र जाप के दौरान बार-बार घड़ी दिखना या समय का ध्यान आना एक संकेत हो सकता है कि आपका मन अभी पूरी तरह एकाग्र नहीं है और बाहरी जगत से जुड़ा हुआ है। इसका अर्थ और कारण निम्न हो सकते हैं:


1. मन की अशांति और एकाग्रता की कमी:

  • घड़ी का बार-बार दिखना यह संकेत देता है कि आपका मन मंत्र जाप के दौरान भटक रहा है।
  • यह एक सामान्य अनुभव है, खासकर जब साधना की शुरुआत होती है या मन अधिक सक्रिय होता है।

2. समय की चिंता (Time Awareness):

  • कभी-कभी, व्यक्ति को यह जानने की उत्सुकता रहती है कि मंत्र जाप में कितना समय बीत चुका है।
  • यह सोच आपकी साधना की गहराई में बाधा डाल सकती है।

3. आध्यात्मिक संकेत या संकेतक (Synchronicity):

  • अगर घड़ी देखने पर कोई विशेष समय (जैसे 11:11, 5:55) बार-बार दिखता है, तो यह ब्रह्मांड की ओर से एक संदेश हो सकता है।
  • इसे अक्सर "Synchronicity" कहा जाता है, जो इस बात का प्रतीक है कि आप अपनी साधना के माध्यम से एक विशेष ऊर्जा स्तर तक पहुंच रहे हैं।

4. मस्तिष्क की आदत:

  • मंत्र जाप के दौरान मन बार-बार ऐसी चीज़ों पर ध्यान देता है जो साधना से परे हैं।
  • यह मस्तिष्क की स्वाभाविक प्रवृत्ति है, जिसे अभ्यास और धैर्य के साथ नियंत्रित किया जा सकता है।

समाधान:

  1. समय की योजना बनाएं:

    • मंत्र जाप शुरू करने से पहले तय कर लें कि आप कितने समय तक जाप करेंगे। अलार्म लगाएं ताकि बार-बार घड़ी देखने की जरूरत न पड़े।
  2. मन को वर्तमान में लाएं:

    • जब भी घड़ी देखने की इच्छा हो, उसे पहचानें और ध्यान को फिर से मंत्र पर केंद्रित करें।
    • धीरे-धीरे यह आदत कम हो जाएगी।
  3. संपूर्ण समर्पण (Surrender):

    • जाप को पूर्ण समर्पण के साथ करें, समय या परिणाम की चिंता किए बिना।
    • इसे एक आंतरिक यात्रा के रूप में देखें, न कि किसी बाहरी मापदंड से नियंत्रित होने वाली प्रक्रिया।
  4. घड़ी को दूर रखें:

    • यदि संभव हो, तो मंत्र जाप के दौरान घड़ी को अपनी दृष्टि से दूर रखें। इससे ध्यान भटकने की संभावना कम होगी।
  5. गुरु या मार्गदर्शक से चर्चा करें:

    • यदि यह अनुभव बार-बार हो रहा है और आपको गहराई तक ध्यान में बाधा आ रही है, तो अपने गुरु या किसी अनुभवी साधक से मार्गदर्शन लें।

ध्यान दें:

यह अनुभव सामान्य है और केवल आपके अभ्यास के दौरान एक चरण हो सकता है। जैसे-जैसे आप साधना में गहराई तक जाएंगे, आपका मन और एकाग्रता स्थिर हो जाएगी। धीरे-धीरे, समय का ध्यान रखना आपके लिए अप्रासंगिक हो जाएगा।


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