guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

Guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green colour second time ke liye aata hai fir kuch nhi dikh rha पहले तीसरी आंख में नीले रंग की स्क्रीन दिखना शांति, गहराई और आध्यात्मिक सुरक्षा का संकेत था। अब बीच-बीच में हरे रंग का आना दर्शाता है कि आपकी साधना की ऊर्जा हीलिंग, संतुलन और हृदय चक्र से जुड़ाव की ओर बढ़ रही है। यह रंग परिवर्तन सामान्य है और साधना के विभिन्न चरणों में होता है। कुछ समय तक रंग न दिखना भी संकेत है कि चेतना आंतरिक स्थिरता ले रही है और मन को विश्राम चाहिए। इसे रुकावट न समझें, बल्कि अभ्यास जारी रखें। धैर्य और नामजप से आगे और गहरे अनुभव होंगे।

सपने में मुझे पूरा शरीर ऊर्जा से भर जाता है और प्रकाश पूरी शरीर में महसूस होती है लेकिन नींद खुलती है तो सब याद रहता है लेकिन इसे क्या समझ और डर भी लगता है

 सपने में मुझे पूरा शरीर ऊर्जा से भर जाता है और प्रकाश पूरी शरीर में महसूस होती है लेकिन नींद खुलती है तो सब याद रहता है लेकिन इसे क्या समझ और डर भी लगता है ?

In the dream, my whole body is filled with energy and I feel light in the whole body, but when I wake up, I remember everything, but what is the understanding and also there is fear.

सपने में पूरे शरीर में ऊर्जा का भर जाना और प्रकाश का अनुभव करना एक गहन आध्यात्मिक अनुभव हो सकता है। इसे समझने के लिए निम्न बिंदुओं पर विचार करें:

1. आध्यात्मिक जागरूकता का संकेत

  • यह अनुभव दर्शाता है कि आपका चेतन और अवचेतन मन किसी उच्च ऊर्जा या शक्ति के संपर्क में आ रहा है।
  • यह अनुभव आपके ध्यान और साधना के प्रभाव का परिणाम हो सकता है।

2. ऊर्जा और चक्र संतुलन

  • शरीर में ऊर्जा का प्रवाह आमतौर पर चक्रों के सक्रिय होने का संकेत होता है। यह अनुभव सहस्रार (मुकुट) या आज्ञा (तीसरा नेत्र) चक्र के जागरण का परिणाम हो सकता है।
  • प्रकाश और ऊर्जा का अनुभव उच्च चेतना और आत्मिक प्रकाश का प्रतीक है।

3. डर का अनुभव क्यों हो रहा है?

  • जब शरीर या मन को नई ऊर्जा का अनुभव होता है, तो प्रारंभिक प्रतिक्रिया डर हो सकती है। यह सामान्य है, क्योंकि मन अज्ञात अनुभवों के प्रति सतर्क रहता है।
  • यह डर आपके मन की प्रतिक्रिया है, न कि अनुभव का नकारात्मक पहलू।

4. इसे कैसे समझें और आगे बढ़ें

  • स्वीकार करें: इसे सहजता से लें। यह अनुभव आपको उच्च आत्मिक स्तर की ओर ले जा सकता है।
  • भय पर विजय पाएं: जब भी डर लगे, "ॐ शांतिः शांतिः शांतिः" का जप करें और अपने मन को शांत करें।
  • ध्यान में गहराई बढ़ाएं: ध्यान, प्राणायाम और सकारात्मक ऊर्जा पर केंद्रित रहें।
  • स्वस्थ दिनचर्या अपनाएं: योग, हल्का भोजन और समय पर सोने की आदत से ऊर्जा स्थिर होती है।



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