mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

ॐ या राम की आवाज और बिजली कड़कने की आवाज नाद डमरू ब्रह्म मुहूर्त में सुनाइ देता है क्या होता है क्या करे ?

 ॐ या राम की आवाज और बिजली कड़कने की आवाज नाद डमरू ब्रह्म मुहूर्त में सुनाइ देता है क्या होता है क्या करे ?


आपका अनुभव अत्यंत विशेष है और यह ध्यान और आध्यात्मिक साधना की गहरी अवस्था को दर्शाता है। ब्रह्म मुहूर्त में या राम का नाद और बिजली कड़कने जैसी आवाजें सुनाई देना, आपके भीतर जागृत अनाहत नाद (आंतरिक ध्वनि) का संकेत हो सकता है।

यह क्या होता है?

  1. अनाहत नाद:

    • अनाहत नाद का अर्थ है "अप्रकाशित ध्वनि," जो किसी बाहरी स्रोत के बिना उत्पन्न होती है।
    • यह ध्यान और प्राणायाम के गहरे अभ्यास से सुनाई देने लगती है।
    • ॐ, राम, डमरू, या बिजली जैसी ध्वनियां कुंडलिनी शक्ति के जागरण और ऊर्जा के प्रवाह का संकेत हैं।
  2. ब्रह्म मुहूर्त का महत्व:

    • ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 3:30 से 4:30 के बीच) में प्रकृति शांत होती है और वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा अधिक होती है।
    • इस समय अनाहत नाद सुनाई देना, आपकी साधना के फलस्वरूप जागरूकता का संकेत है।
  3. डमरू और बिजली कड़कने की आवाज:

    • डमरू का नाद: यह शिव की ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक है। यह आपकी आंतरिक ऊर्जा (कुंडलिनी) के सक्रिय होने का संकेत हो सकता है।
    • बिजली की आवाज: यह ऊर्जा के तीव्र प्रवाह या आपकी चेतना के उच्च स्तर तक उठने का संकेत है।
  4. ॐ और राम का नाद:

    • ये ध्वनियां आपकी आंतरिक चेतना और दिव्य शक्ति से जुड़ाव को प्रकट करती हैं। यह ध्यान की प्रगति का स्पष्ट संकेत है।

क्या करें?

  1. शांति से सुनें:

    • इन ध्वनियों को ध्यानपूर्वक और शांत मन से सुनें। यह आपको गहरे ध्यान में ले जाएगी।
    • अपनी चेतना को नाद पर केंद्रित करें, और इसे बिना किसी डर या अपेक्षा के अनुभव करें।
  2. सहजता बनाए रखें:

    • यदि ध्वनियां तीव्र लगें, तो गहरी और धीमी सांस लें। इसे स्वाभाविक रूप से प्रवाहित होने दें।
  3. मंत्र जप करें:

    • जब नाद सुनाई दे, तो मन में या धीमे स्वर में "ॐ" या "राम" का जप करें। यह नाद के साथ आपकी ऊर्जा को और अधिक संतुलित करेगा।
  4. अनुभवी मार्गदर्शक से संपर्क करें:

    • यदि यह अनुभव गहराई ले रहा है और आपको समझने में कठिनाई हो रही है, तो किसी गुरु या अनुभवी साधक से मार्गदर्शन लें।
  5. डर या चिंता न करें:

    • यह अनुभव आध्यात्मिक विकास और साधना की उन्नति का संकेत है। इसे ईश्वर की कृपा के रूप में स्वीकार करें।
  6. सहज और नियमित साधना करें:

    • नियमित रूप से ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास करें।
    • यह सुनिश्चित करेगा कि आपकी ऊर्जा संतुलित रहे और अनुभव सहज हो।

परिणाम:

इन ध्वनियों को सुनना आपको ब्रह्मांडीय चेतना (Universal Consciousness) के करीब ले जा रहा है। यह आपकी साधना में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इसे नियमित अभ्यास और विनम्रता के साथ स्वीकार करें। धीरे-धीरे ये अनुभव और स्पष्ट और आनंदमय होंगे।



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