guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

Guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green colour second time ke liye aata hai fir kuch nhi dikh rha पहले तीसरी आंख में नीले रंग की स्क्रीन दिखना शांति, गहराई और आध्यात्मिक सुरक्षा का संकेत था। अब बीच-बीच में हरे रंग का आना दर्शाता है कि आपकी साधना की ऊर्जा हीलिंग, संतुलन और हृदय चक्र से जुड़ाव की ओर बढ़ रही है। यह रंग परिवर्तन सामान्य है और साधना के विभिन्न चरणों में होता है। कुछ समय तक रंग न दिखना भी संकेत है कि चेतना आंतरिक स्थिरता ले रही है और मन को विश्राम चाहिए। इसे रुकावट न समझें, बल्कि अभ्यास जारी रखें। धैर्य और नामजप से आगे और गहरे अनुभव होंगे।

प्राणायाम से सात चक्रों को जागृत किया जा सकता है ?

 प्राणायाम से सात चक्रों को जागृत किया जा सकता है ?


हां, प्राणायाम के माध्यम से सात चक्रों को सक्रिय (जागृत) और संतुलित किया जा सकता है। प्राणायाम शरीर के भीतर प्राण (जीवनी शक्ति) को नियंत्रित करता है, जिससे ऊर्जा का प्रवाह बेहतर होता है और चक्रों का संतुलन स्थापित होता है। प्रत्येक प्राणायाम का प्रभाव अलग-अलग चक्रों पर पड़ता है।

सात चक्र और संबंधित प्राणायाम:

1. मूलाधार चक्र (Root Chakra)

  • स्थान: रीढ़ के आधार पर।
  • प्राणायाम:
    • भस्त्रिका प्राणायाम: यह ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाता है और मूलाधार चक्र को सक्रिय करता है।
    • मूलबंध: गुदा क्षेत्र को संकुचित करने का अभ्यास, जो मूलाधार की ऊर्जा को जागृत करता है।
  • लाभ: स्थिरता, सुरक्षा और आत्मविश्वास।

2. स्वाधिष्ठान चक्र (Sacral Chakra)

  • स्थान: नाभि के नीचे।
  • प्राणायाम:
    • नाड़ी शोधन (अनुलोम-विलोम): ऊर्जा को संतुलित करता है और भावनाओं को स्थिर करता है।
    • कपालभाति: पेट के क्षेत्र की ऊर्जा को सक्रिय करता है।
  • लाभ: रचनात्मकता, यौन ऊर्जा और भावनात्मक स्थिरता।

3. मणिपुर चक्र (Solar Plexus Chakra)

  • स्थान: नाभि के पास।
  • प्राणायाम:
    • कपालभाति: नाभि क्षेत्र में गर्मी और ऊर्जा को बढ़ाता है।
    • अग्निसार क्रिया: पेट की मांसपेशियों को हिलाने वाला अभ्यास।
  • लाभ: आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति और व्यक्तिगत शक्ति।

4. अनाहत चक्र (Heart Chakra)

  • स्थान: हृदय क्षेत्र।
  • प्राणायाम:
    • भ्रामरी प्राणायाम: हृदय और मन को शांति देता है।
    • अनुलोम-विलोम: ऊर्जा को संतुलित कर प्रेम और करुणा बढ़ाता है।
  • लाभ: प्रेम, दया और संबंध।

5. विशुद्धि चक्र (Throat Chakra)

  • स्थान: गले के पास।
  • प्राणायाम:
    • ऊज्जयी प्राणायाम: गले की ऊर्जा को सक्रिय करता है।
    • सिंह मुद्रा: गले की रुकावट को दूर करता है।
  • लाभ: संवाद, अभिव्यक्ति और सत्य।

6. आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra)

  • स्थान: भौंहों के बीच।
  • प्राणायाम:
    • नाड़ी शोधन: ऊर्जा का प्रवाह माथे तक ले जाता है।
    • शीतली प्राणायाम: गर्मी को कम करके एकाग्रता बढ़ाता है।
  • लाभ: अंतर्दृष्टि, एकाग्रता और आंतरिक जागरूकता।

7. सहस्रार चक्र (Crown Chakra)

  • स्थान: सिर के शीर्ष पर।
  • प्राणायाम:
    • केवल कुंभक: सांस को रोकने का अभ्यास सहस्रार चक्र को सक्रिय करता है।
    • नाड़ी शोधन: ऊर्जा को शीर्ष तक पहुंचाने में सहायक।
  • लाभ: आध्यात्मिक जागृति और ब्रह्मांडीय चेतना।

ध्यान रखें:

  1. आसन: प्राणायाम करते समय रीढ़ सीधी होनी चाहिए।
  2. आहार: सात्विक आहार लें, जिससे ऊर्जा शुद्ध और संतुलित हो।
  3. नियमितता: प्राणायाम को रोज़ करें, लेकिन धीरे-धीरे समय और अवधि बढ़ाएं।
  4. शांत मन: चक्रों की ऊर्जा को जागृत करने के लिए ध्यान और जप का सहारा लें।


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