guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

Guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green colour second time ke liye aata hai fir kuch nhi dikh rha पहले तीसरी आंख में नीले रंग की स्क्रीन दिखना शांति, गहराई और आध्यात्मिक सुरक्षा का संकेत था। अब बीच-बीच में हरे रंग का आना दर्शाता है कि आपकी साधना की ऊर्जा हीलिंग, संतुलन और हृदय चक्र से जुड़ाव की ओर बढ़ रही है। यह रंग परिवर्तन सामान्य है और साधना के विभिन्न चरणों में होता है। कुछ समय तक रंग न दिखना भी संकेत है कि चेतना आंतरिक स्थिरता ले रही है और मन को विश्राम चाहिए। इसे रुकावट न समझें, बल्कि अभ्यास जारी रखें। धैर्य और नामजप से आगे और गहरे अनुभव होंगे।

जिनको नाद सुनता है क्या उनको सुमिरन की जरूरत नहीं होती।

 जिनको नाद सुनता है क्या उनको सुमिरन की जरूरत नहीं होती।

Those who hear the Anhad naad sound, don't they need remembrance?


नाद सुनने का अनुभव आत्मा की गहराई में ध्यान और साधना की परिपक्वता का सूचक है। यह अनुभव अद्वितीय होता है और साधक को भीतर से जोड़ता है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि सुमिरन (जप या ध्यान) की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

सुमिरन का मुख्य उद्देश्य मन को शुद्ध करना, ध्यान को स्थिर करना और आत्मा को परमात्मा से जोड़ना है। नाद सुनने वाले साधकों के लिए सुमिरन का महत्व और भी बढ़ सकता है, क्योंकि यह उन्हें नाद में गहराई से डूबने और उसकी दिव्यता का अनुभव करने में सहायता करता है।

इसके अलावा:

  1. सुमिरन मन को संयमित करता है: नाद सुनने के बावजूद मन चंचल हो सकता है। सुमिरन उसे नियंत्रित करता है।
  2. सुमिरन मार्गदर्शन करता है: यह साधक को ऊर्जा के सही प्रवाह और उच्च अनुभवों की ओर ले जाता है।
  3. साधना का संतुलन: नाद और सुमिरन साथ मिलकर साधना को संतुलित और समृद्ध करते हैं।

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