guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

Guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green colour second time ke liye aata hai fir kuch nhi dikh rha पहले तीसरी आंख में नीले रंग की स्क्रीन दिखना शांति, गहराई और आध्यात्मिक सुरक्षा का संकेत था। अब बीच-बीच में हरे रंग का आना दर्शाता है कि आपकी साधना की ऊर्जा हीलिंग, संतुलन और हृदय चक्र से जुड़ाव की ओर बढ़ रही है। यह रंग परिवर्तन सामान्य है और साधना के विभिन्न चरणों में होता है। कुछ समय तक रंग न दिखना भी संकेत है कि चेतना आंतरिक स्थिरता ले रही है और मन को विश्राम चाहिए। इसे रुकावट न समझें, बल्कि अभ्यास जारी रखें। धैर्य और नामजप से आगे और गहरे अनुभव होंगे।

ध्यान में जब भी अपनी आंखों को बैंड करके आइब्रो के बीच में देखती हूं तो मेरी आंखें बहुत गरम होती हैं और मुझे अपनी आंखें खोलनी पड़ती हैं?

 ध्यान में जब भी अपनी आंखों को बैंड करके आइब्रो के बीच में देखती हूं तो मेरी आंखें बहुत गरम होती हैं और मुझे अपनी आंखें खोलनी पड़ती हैं?


ध्यान में जब आप अपनी आँखें बंद करके भ्रूमध्य (आइब्रो के बीच) पर ध्यान केंद्रित करती हैं और गर्मी महसूस करती हैं, तो यह अनुभव आपकी ऊर्जा या प्राणशक्ति के सक्रिय होने का संकेत हो सकता है। यह सामान्य है, विशेष रूप से जब आप ध्यान और आंतरिक ध्यान केंद्रों (चक्रों) पर ध्यान केंद्रित करना शुरू करती हैं।

इस स्थिति में क्या करें:

  1. आराम से रहें:

    • अपनी आँखों पर ज़ोर डालने की बजाय धीरे-धीरे उस स्थान पर ध्यान केंद्रित करें। इसे सहजता से करें, जैसे आप किसी वस्तु को हल्के से देख रही हों।
    • यदि बहुत गर्मी या असुविधा हो तो कुछ समय के लिए ध्यान हटाकर सामान्य सांसों पर ध्यान केंद्रित करें।
  2. नेत्रों की मांसपेशियों को आराम दें:

    • आंखों को तनाव में न रखें। ध्यान करने के बाद उन्हें आराम देने के लिए अपनी हथेलियों को रगड़कर आंखों पर हल्का रखें।
  3. शीतल अनुभव के लिए:

    • ध्यान से पहले अपनी आंखों और माथे पर गुलाब जल या ठंडे पानी से हल्का स्पर्श करें।
    • "चंद्र भेदी प्राणायाम" (बाएं नासिका से सांस लेना और दाएं से छोड़ना) करने से ठंडक मिल सकती है।
  4. ध्यान की गहराई बढ़ाने के लिए:

    • किसी मंत्र का उपयोग करें, जैसे "ॐ" या "सोऽहम।" इससे आपका ध्यान ऊर्जा प्रवाह पर केंद्रित रहेगा और शारीरिक असुविधा कम महसूस होगी।
  5. छोटी अवधि से शुरू करें:

    • भ्रूमध्य पर ध्यान लगाने का अभ्यास शुरुआत में 5-10 मिनट तक सीमित रखें। धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।
  6. नेत्र और मस्तिष्क की संवेदनशीलता:

    • यदि आपको यह बार-बार हो रहा है, तो यह संकेत है कि आपका आज्ञा चक्र (तीसरा नेत्र) सक्रिय हो रहा है। इस ऊर्जा को संतुलित रखने के लिए भ्रामरी प्राणायाम (भंवरे की ध्वनि का प्राणायाम) करें।



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