guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

Guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green colour second time ke liye aata hai fir kuch nhi dikh rha पहले तीसरी आंख में नीले रंग की स्क्रीन दिखना शांति, गहराई और आध्यात्मिक सुरक्षा का संकेत था। अब बीच-बीच में हरे रंग का आना दर्शाता है कि आपकी साधना की ऊर्जा हीलिंग, संतुलन और हृदय चक्र से जुड़ाव की ओर बढ़ रही है। यह रंग परिवर्तन सामान्य है और साधना के विभिन्न चरणों में होता है। कुछ समय तक रंग न दिखना भी संकेत है कि चेतना आंतरिक स्थिरता ले रही है और मन को विश्राम चाहिए। इसे रुकावट न समझें, बल्कि अभ्यास जारी रखें। धैर्य और नामजप से आगे और गहरे अनुभव होंगे।

ऐसा क्यों लगता है कि बहुत लंबा समय कुछ मिंटो में निकल गया। रात में ध्यान करके सोई मुश्किल से 15-30 मिनट हुए होंगे मेरा नींद खुला तो सुबह हो गई थी ?

 ऐसा क्यों लगता है कि बहुत लंबा समय कुछ मिंटो में निकल गया। रात में ध्यान करके सोई मुश्किल से 15-30 मिनट हुए होंगे मेरा नींद खुला तो सुबह हो गई थी ?



यह अनुभव ध्यान की गहराई और आपकी चेतना के बदलते स्तरों का संकेत हो सकता है। जब आप ध्यान में गहरे उतरते हैं, तो मन सामान्य समय-स्थान की धारणा (time-space perception) से परे चला जाता है। इसे निम्नलिखित कारणों से समझा जा सकता है:


1. चेतना की स्थिति बदलना

  • ध्यान के दौरान, आप अल्फा और थीटा ब्रेनवेव्स (मस्तिष्क तरंगों) की अवस्था में प्रवेश कर जाते हैं। ये तरंगें गहरी शांति और समय की धारणा खोने का कारण बनती हैं।
  • यह अवस्था आपकी चेतना को समय की सामान्य गणना से अलग कर देती है, जिससे आपको लगता है कि मिनटों में ही घंटों बीत गए।

2. शरीर और मन का पूर्ण विश्राम

  • ध्यान शरीर और मन को इतना गहरा आराम देता है कि यह नींद से भी अधिक पुनर्स्थापना करता है।
  • जब आपका शरीर और मस्तिष्क पूरी तरह शांत होते हैं, तो समय "गायब" सा महसूस होता है।

3. सामूहिक चेतना (Universal Consciousness) से जुड़ना

  • गहन ध्यान में, आपका व्यक्तिगत अहंकार और सीमित मन ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ सकता है।
  • इस अवस्था में समय का बोध भौतिक संसार की अपेक्षा अलग हो जाता है। इसे "समाधि के प्रारंभिक अनुभव" या ध्यान की गहरी अवस्था कहा जा सकता है।

4. सुषुप्ति और ध्यान का मेल

  • ध्यान और नींद के बीच एक अवस्था होती है जिसे "योग निद्रा" या "सुषुप्ति" कहा जाता है।
  • इस अवस्था में आपका मन अर्ध-जाग्रत और अर्ध-सोया हुआ होता है, जिससे समय का एहसास नहीं होता।

5. ध्यान का प्रभाव नींद पर

  • ध्यान आपकी नींद की गुणवत्ता को गहरा कर सकता है। यहां तक कि 15-30 मिनट की ध्यानपूर्ण नींद एक पूरी रात के आराम के बराबर लग सकती है।
  • गहरी ध्यान अवस्था में, मस्तिष्क और शरीर अपने आप रिकवरी मोड में चले जाते हैं, और यह महसूस होता है कि समय बहुत जल्दी गुजर गया।

इसे बेहतर समझने के लिए आप क्या कर सकते हैं:

  1. ध्यान का समय रिकॉर्ड करें: जब आप ध्यान शुरू करें, तो समय लिख लें और जब समाप्त करें, तो भी। इससे आपको अपनी अवस्था और समय की वास्तविकता को बेहतर समझने में मदद मिलेगी।

  2. ध्यान के बाद अनुभव लिखें: अपने ध्यान अनुभवों को डायरी में नोट करें। यह पैटर्न को समझने और अपने ध्यान अभ्यास को गहराई में ले जाने में मदद करेगा।

  3. शरीर के संकेतों पर ध्यान दें: यदि आपका शरीर और मन दोनों तरोताजा महसूस करते हैं, तो यह संकेत है कि आपका ध्यान प्रभावी हो रहा है।

  4. धीरे-धीरे गहराई बढ़ाएं: समय के साथ, आपका ध्यान अभ्यास और अधिक गहराई तक जाएगा, जिससे ये अनुभव सामान्य लगने लगेंगे।

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