Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

गुरुजी प्रणाम, मेरा 2 माह होगया मेरा अज्ञान चक्र, सहस्र चक्र लगतर कंपन करता है, मैं केवल नाम जप और ध्यान करता हूं। मेरा कोई गुरु नहीं, भगवान वासुदेव को मैं गुरु मानता हूं, उम्र में क्या करूं, कृपया उपाय बताएं। मुझे कोई प्रकाश नेहिं देखाइदेता, केवल कंपन करता है।

 गुरुजी प्रणाम, मेरा 2 माह होगया मेरा अज्ञान चक्र, सहस्र चक्र लगतर कंपन करता है, मैं केवल नाम जप और ध्यान करता हूं। मेरा कोई गुरु नहीं, भगवान वासुदेव को मैं गुरु मानता हूं, उम्र में क्या करूं, कृपया उपाय बताएं। मुझे कोई प्रकाश नेहिं देखाइदेता, केवल कंपन करता है। ?


प्रणाम, आपका आज्ञा चक्र और सहस्रार चक्र में लगातार कंपन होना दर्शाता है कि ऊर्जा सक्रिय हो रही है। यह एक महत्वपूर्ण अवस्था है, लेकिन संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। आप भगवान वासुदेव को गुरु मानते हैं, यह बहुत शुभ है—उनकी कृपा से ही यह अनुभव हो रहा है।

उपाय:

  1. साधना में संतुलन रखें – अधिक जोर न दें, सहजता से ध्यान करें।
  2. जप जारी रखें – "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" या "ॐ" का जप करें।
  3. भूखे पेट ध्यान न करें – हल्का भोजन करें।
  4. धरती से जुड़ें – नंगे पैर घास पर चलें।

धैर्य रखें, प्रकाश भी प्रकट होगा। 🙏

Comments

Popular posts from this blog

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....