Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

मैं जब ध्यान में बैठता हूं तो मुझे सिटी की आवाज सुनाई देती है.. लेकिन जब मैं ध्यान में बैठता हूं तो मुझे ऐसा लगता है जैसे शांत पानी जैसे कुछ गिरने से जो तरंगे बनती है ऐसा अंधेर में महसुस या दिखता है.. कभी-कभी वो तरंगे रंगीन भी होती है..यही मेरा ध्यान नहीं लग पता है

 मैं जब ध्यान में बैठता हूं तो मुझे सिटी की आवाज सुनाई देती है.. लेकिन जब मैं ध्यान में बैठता हूं तो मुझे ऐसा लगता है जैसे शांत पानी जैसे कुछ गिरने से जो तरंगे बनती है ऐसा अंधेर में महसुस या दिखता है.. कभी-कभी वो तरंगे रंगीन भी होती है..यही मेरा ध्यान नहीं लग पता है?


ध्यान के दौरान सीटी की आवाज़ सुनाई देना और शांत पानी में गिरने से उठने वाली तरंगों का अनुभव ध्यान की गहरी अवस्था का संकेत हो सकता है। यह अनाहत नाद (आंतरिक ध्वनि) और ऊर्जा प्रवाह का प्रतीक है। जब ये तरंगें रंगीन होती हैं, तो यह आपके चक्रों के सक्रिय होने और ऊर्जा संतुलन में बदलाव का संकेत हो सकता है।

ध्यान नहीं लग पाने का कारण इन अनुभवों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना हो सकता है। ध्यान का उद्देश्य अनुभवों को देखना, लेकिन उनसे जुड़ाव न रखना है। इसे सहज रूप से बहने दें। यदि ध्यान भटकता है, तो सांसों पर ध्यान केंद्रित करें या मंत्र का जप करें। नियमित अभ्यास से यह बाधा धीरे-धीरे दूर होगी। ये अनुभव आध्यात्मिक प्रगति के संकेत हैं, लेकिन उन्हें केवल साक्षी भाव से देखने का प्रयास करें।

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