क्या आप ये बता सकते हो की ध्यान में हम कुछ बोलना भी शुरू कर देते हैँ

 क्या आप ये बता सकते हो की ध्यान में हम कुछ बोलना भी शुरू कर देते हैँ?


ध्यान में कुछ बोलना या स्वाभाविक रूप से शब्द निकलना एक गहरी स्थिति का संकेत हो सकता है। इसे स्वत: भाषण (automatic speech) कहा जाता है, जो ध्यान के दौरान अचेतन मन या गहरी चेतना के उभरने का परिणाम है। यह अक्सर तब होता है जब साधक गहन ध्यान में होते हैं, और उनकी ऊर्जा या भावनाएं शब्दों के रूप में प्रकट होने लगती हैं। ये शब्द मंत्र, प्रार्थना, या अनजाने ध्वनि स्वरूप भी हो सकते हैं। इसे रोकने की कोशिश न करें; बल्कि इसे सहजता से स्वीकारें। यह प्रक्रिया आत्म-अभिव्यक्ति और आंतरिक शुद्धि का हिस्सा हो सकती है।

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