Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

ध्यान में झटके लगते हैं !! नीचे से ऊपर तक एक सांप सा घूमता है भाई

 

ध्यान में झटके लगते हैं !! नीचे से ऊपर तक एक सांप सा घूमता है भाई ?

ध्यान में झटके लगना और शरीर में ऊर्जा का महसूस होना एक सामान्य अनुभव हो सकता है, खासकर जब आप गहरे ध्यान या ध्यान की गहरी साधना में होते हैं। नीचे से ऊपर तक सांप की तरह घूमने वाली ऊर्जा का अनुभव कुंडलिनी शक्ति के जागरण का संकेत हो सकता है। यह शक्ति मुलाधार चक्र से ऊपर की ओर यात्रा करती है और शरीर में तेज़ ऊर्जा का संचार करती है।

इन अनुभवों को बिना डर के स्वीकार करें, क्योंकि यह आपकी आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा है। ध्यान में स्थिरता बनाए रखें, और गहरी साधना के साथ अपने शरीर और मन को संतुलित रखें।

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