Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

मूलाधार चक्र कितने दिन मे जगृत होगा

 मूलाधार चक्र कितने दिन मे जगृत होगा ?


मूलाधार चक्र के जागरण का समय व्यक्ति की साधना, समर्पण, और ऊर्जा स्तर पर निर्भर करता है। यह कुछ हफ्तों से लेकर महीनों या वर्षों तक भी लग सकता है। नियमित ध्यान, प्राणायाम, और मूलाधार चक्र का बीज मंत्र "लं" का जप करने से जागरण की प्रक्रिया तेज हो सकती है। इसके साथ, सात्विक जीवनशैली, संयमित आहार, और नकारात्मक भावनाओं से मुक्त रहना महत्वपूर्ण है। चक्र जागरण का अनुभव गर्मी, कंपन, या नाभि के पास ऊर्जा के प्रवाह के रूप में हो सकता है। धैर्य और निरंतर अभ्यास से मूलाधार चक्र धीरे-धीरे सक्रिय और संतुलित होता है।

Comments

  1. Dear teacher could I ask if we should try to listern to anhad shabd from our right ear or the centre of our forehead as when I listern to anhad shabd I can hear a different sound from the centre of my head and a different sound from my right ear at the same time and I am confused on which sound I should be listening too and where from?

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