Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Guruji me Sirf Sakshi bhav se Dhyan karta hu kya isse muje dhyan me anubhav hoge?

 Guruji me Sirf Sakshi bhav se Dhyan karta hu kya isse muje dhyan me anubhav hoge ?


हाँ, साक्षी भाव से ध्यान करना सर्वोत्तम मार्गों में से एक है। जब आप केवल साक्षी बनकर ध्यान करते हैं—बिना किसी अपेक्षा, बिना किसी हस्तक्षेप—तो गहरी अवस्था स्वतः प्रकट होती है।

क्या होगा?

  1. मानसिक शांति बढ़ेगी – विचार धीरे-धीरे कम होंगे।
  2. ऊर्जा संतुलित होगी – कोई विशेष अनुभव आए या न आए, चेतना का विस्तार होगा।
  3. आंतरिक प्रकाश प्रकट होगा – यह समय पर निर्भर करता है, जल्दबाजी न करें।
  4. गहरी अनुभूतियाँ स्वतः होंगी – बस निरंतरता बनाए रखें।

साक्षी भाव में रहना ही सच्चा ध्यान है, जारी रखें। 🙏

Comments

Popular posts from this blog

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....