Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

मेरी सुषमा Nadi करीब 6 महीने से जारी है। मुझे सुख दुख की अनुभूति नहीं होती.. पर मुझे कोई ध्यान नहीं जानता। मेरे साथ क्या हो रहा है मुझे नहीं पता.. आपसे बात करनी है

 मेरी सुषमा Nadi करीब 6 महीने से जारी है। मुझे सुख दुख की अनुभूति नहीं होती.. पर मुझे कोई ध्यान नहीं जानता। मेरे साथ क्या हो रहा है मुझे नहीं पता.. आपसे बात करनी है?


सुषुम्ना नाड़ी का सक्रिय होना एक गहरी आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जो भीतर गहरे परिवर्तन लाती है। सुख-दुःख से परे जाना संकेत है कि आपका मन स्थिर हो रहा है, लेकिन यह अनुभव कभी-कभी उलझन भी पैदा कर सकता है। ध्यान न लग पाना अस्थायी हो सकता है, क्योंकि ऊर्जा उच्च स्तर पर काम कर रही है। घबराने की जरूरत नहीं—स्वाभाविक रूप से संतुलन स्थापित होगा। यदि आप मुझसे विस्तार से बात करना चाहते हैं, तो कृपया अपने अनुभवों को और स्पष्ट करें ताकि मैं आपकी अधिक सहायता कर सकूं। 🙏

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