Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Aagya chakra khulne ke bad aakho ke chasma ka number hat jata hai???

 Aagya chakra khulne ke bad aakho ke chasma ka number hat jata hai???


आज्ञा चक्र के जागरण से दृष्टि शक्ति बढ़ सकती है, लेकिन यह पूरी तरह से चश्मे का नंबर हटाने की गारंटी नहीं है। हालाँकि, कुछ साधकों को नेत्र ज्योति में सुधार का अनुभव होता है।

  1. त्राटक और नेत्र योग से आँखों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।
  2. संतुलित आहार (गाजर, आंवला, बादाम) नेत्र स्वास्थ्य में सहायक होता है।
  3. सूर्य त्राटक और भ्रामरी प्राणायाम से दृष्टि में सुधार आ सकता है।
  4. अति प्रयोग से सिरदर्द या आँखों में दबाव महसूस हो सकता है, इसलिए ध्यानपूर्वक साधना करें।

नियमित अभ्यास से लाभ मिल सकता है।

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