Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

गुरुजी मेरी स्थिति से जा रही हूं वो ये कि, मेरे मुकुट चक्र पर मुझे बहुत दबाव महसूस होता है, ऐसा लगता है कि कोई दबा रहा है और ये सिर्फ ध्यान देने का समय ही नहीं है, पूरा दिन महसूस हो रहा है, इसलिए मुझे दबाव महसूस हो रहा है, कृपया मुझे बताएं कि मुझे क्या करना चाहिए

 गुरुजी मेरी स्थिति से जा रही हूं वो ये कि, मेरे मुकुट चक्र पर मुझे बहुत दबाव महसूस होता है, ऐसा लगता है कि कोई दबा रहा है और ये सिर्फ ध्यान देने का समय ही नहीं है, पूरा दिन महसूस हो रहा है, इसलिए मुझे दबाव महसूस हो रहा है, कृपया मुझे बताएं कि मुझे क्या करना चाहिए ?


मुकुट चक्र (सहस्रार) पर लगातार दबाव महसूस होना दर्शाता है कि आपकी ऊर्जा ऊपर की ओर अधिक सक्रिय हो रही है। यह जागरण की प्रक्रिया का संकेत हो सकता है, लेकिन यदि यह पूरे दिन बना रहता है और असहजता महसूस होती है, तो संतुलन बनाना आवश्यक है।

उपाय:

  1. ग्राउंडिंग करें – नंगे पैर धरती पर चलें, पेड़ों के संपर्क में रहें, और जड़ (मूलाधार) चक्र पर ध्यान दें।
  2. प्राणायाम करें – गहरी सांस लें, विशेष रूप से अनुलोम-विलोम और भ्रामरी करें।
  3. भोजन संतुलित करें – गरिष्ठ और पौष्टिक भोजन लें, जिससे ऊर्जा शरीर में संतुलित रहे।
  4. जप और ध्यान में संयम रखें – अधिक ध्यान करने से मुकुट चक्र पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए धीरे-धीरे अभ्यास करें।
  5. संयमित दिनचर्या अपनाएं – नियमित दिनचर्या और पर्याप्त विश्राम लें।

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