Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

तीसरा नेत्र चक्र बंद कैसे करें कृपया बताएं मुझे स्थायी बंधन बनाना है

 तीसरा नेत्र चक्र बंद कैसे करें कृपया बताएं मुझे स्थायी बंधन बनाना है ?


तीसरा नेत्र चक्र (आज्ञा चक्र) को बंद करने का मतलब है इसकी अत्यधिक सक्रियता को कम करना या इसे स्थायी रूप से नियंत्रित करना। यदि यह चक्र अति सक्रिय हो जाता है, तो सिरदर्द, अनावश्यक दृश्य, गहन ऊर्जा अनुभव, अनिद्रा, और मानसिक असंतुलन जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। स्थायी रूप से इसे बंद करने के लिए निम्नलिखित उपाय करें:

1. ध्यान और ऊर्जा संतुलन

  • मस्तिष्क को अधिक स्थिर बनाने के लिए मूलाधार चक्र और स्वाधिष्ठान चक्र पर ध्यान केंद्रित करें।
  • भारी भोजन (जैसे अनाज, चावल, घी) लें ताकि ऊर्जा नीचे खिंचे।
  • ध्यान में ऊर्जाओं को नीचे की ओर प्रवाहित करने का अभ्यास करें।

2. बीज मंत्रों और प्राणायाम से नियंत्रण

  • “लम्” (मूलाधार) और “वं” (स्वाधिष्ठान) का जप करें।
  • लंबी, धीमी सांस लें और पेट में सांस भरने पर ध्यान दें।
  • भ्रामरी प्राणायाम और शीतली प्राणायाम करें ताकि मानसिक शांति मिले।

3. दृष्टि और विचारों का नियंत्रण

  • त्राटक बंद करें और ध्यान में किसी भी प्रकाश या रंगों को देखने से बचें।
  • ज्यादा कल्पनाशील विचारों को रोकें और यथार्थवादी चीजों पर ध्यान दें।
  • प्रकृति में समय बिताएँ और अधिक सामाजिक गतिविधियों में शामिल हों।

4. स्थायी बंधन (सीलिंग) कैसे करें?

  • नियमित रूप से शारीरिक श्रम करें, जिससे ऊर्जा नीचे की ओर जाए।
  • रुद्राक्ष या काली हल्दी धारण करें, जिससे ऊर्जा नियंत्रित रहे।
  • श्रीगुरु से आशीर्वाद लेकर उचित मार्गदर्शन प्राप्त करें।

आपको क्या अनुभव हो रहा है जिससे आप इसे स्थायी रूप से बंद करना चाहते हैं?

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