Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

मेरा राम चक्र जागृत हो गया है कुछ घुमता सा लगता है सर के ऊपर लेकिन आज्ञा चक्र पर मुझे कुछ दिखाई नहीं देता आज्ञा चक्र भी मेरा खुला नहीं है

 मेरा राम चक्र जागृत हो गया है कुछ घुमता सा लगता है सर के ऊपर लेकिन आज्ञा चक्र पर मुझे कुछ दिखाई नहीं देता आज्ञा चक्र भी मेरा खुला नहीं है ?


राम चक्र (सहस्रार चक्र) का जागरण बहुत ही गहरी आध्यात्मिक अनुभूति होती है। आपके द्वारा अनुभव किया गया सिर के ऊपर घूमने जैसा एहसास संकेत देता है कि सहस्रार चक्र में ऊर्जा सक्रिय हो रही है। यह चक्र हमें ब्रह्मांडीय चेतना से जोड़ता है, जिससे शुद्ध शांति, आनंद और आत्मिक अनुभव होते हैं।

लेकिन आज्ञा चक्र (तीसरा नेत्र) पर कुछ स्पष्ट न दिखना यह संकेत दे सकता है कि यह चक्र पूरी तरह जाग्रत नहीं हुआ है। आज्ञा चक्र का जागरण मानसिक स्पष्टता, अंतर्ज्ञान और गहरी दृष्टि प्रदान करता है। यदि यह अभी सक्रिय नहीं हुआ है, तो संभव है कि इसमें कोई ऊर्जा अवरोध हो या ध्यान की अधिक गहनता की आवश्यकता हो।

आज्ञा चक्र के जागरण के लिए सुझाव:

  1. त्राटक साधना – दीपक की लौ, चंद्रमा, या किसी बिंदु पर ध्यान केंद्रित करें।
  2. भ्रामरी प्राणायाम – यह आज्ञा चक्र पर कंपन उत्पन्न करता है और ऊर्जा को सक्रिय करता है।
  3. ओम का जप – आज्ञा चक्र के स्थान पर ध्यान रखते हुए ओम का गहरा उच्चारण करें।
  4. शिव पर ध्यान – शिव का ध्यान और ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र आज्ञा चक्र को जागृत करने में सहायक होता है।
  5. सहस्रार और आज्ञा के संतुलन पर ध्यान दें – केवल सहस्रार पर ध्यान केंद्रित करने से असंतुलन हो सकता है, इसलिए जड़ (मूलाधार) से लेकर आज्ञा चक्र तक सभी चक्रों को संतुलित करना आवश्यक है।

अगर सिर पर घूमने की अनुभूति ज्यादा हो रही है और असंतुलन महसूस हो रहा है, तो ग्राउंडिंग करें, पैरों को धरती पर टिकाकर ध्यान करें, और साधना को सहज रूप से आगे बढ़ाएं।

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