गुरुजी मेरे तीसरी आंख के बाईं ओर या दोनों तरफ जेसे कोई आख फरकती है वेसे ही ललाट पे होता है ?

 गुरुजी मेरे तीसरी आंख के बाईं ओर या दोनों तरफ जेसे कोई आख फरकती है वेसे ही ललाट पे होता है ?


यह अनुभव दर्शाता है कि आपकी आज्ञा चक्र (तीसरी आंख) की ऊर्जा सक्रिय हो रही है। जब तीसरी आंख जाग्रत होती है, तो वहाँ हलचल, स्पंदन, या फड़कने जैसा अनुभव हो सकता है। यह ऊर्जा प्रवाह का संकेत है, जो धीरे-धीरे स्थिर होता जाएगा। बाईं ओर अधिक कंपन होने का अर्थ है कि आपकी चंद्र (शीतल) ऊर्जा अधिक सक्रिय है। यदि दोनों ओर हो रहा है, तो यह संतुलन स्थापित होने का संकेत हो सकता है। ध्यान और मंत्र जाप जारी रखें, लेकिन अत्यधिक ध्यान से बचें। सहज भाव से साधना करें और शरीर के संकेतों को स्वीकार करें।

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