guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

Guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green colour second time ke liye aata hai fir kuch nhi dikh rha पहले तीसरी आंख में नीले रंग की स्क्रीन दिखना शांति, गहराई और आध्यात्मिक सुरक्षा का संकेत था। अब बीच-बीच में हरे रंग का आना दर्शाता है कि आपकी साधना की ऊर्जा हीलिंग, संतुलन और हृदय चक्र से जुड़ाव की ओर बढ़ रही है। यह रंग परिवर्तन सामान्य है और साधना के विभिन्न चरणों में होता है। कुछ समय तक रंग न दिखना भी संकेत है कि चेतना आंतरिक स्थिरता ले रही है और मन को विश्राम चाहिए। इसे रुकावट न समझें, बल्कि अभ्यास जारी रखें। धैर्य और नामजप से आगे और गहरे अनुभव होंगे।

guru ji kripya Rechak-Kumbhak-Purak or dhiyan karne ka sahi vidhi kya hai k bare me bhi avgat karaye

  guru ji kripya Rechak-Kumbhak-Purak or dhiyan karne ka sahi vidhi kya hai k bare me bhi avgat karaye ?


रेचक, कुम्भक और पूरक प्राणायाम की तीन मुख्य अवस्थाएँ हैं:

  1. पूरक – श्वास को गहराई से भरना। नाक से धीरे-धीरे लंबी सांस लें और पेट व फेफड़ों को पूरी तरह भरें।
  2. कुम्भक – सांस को रोके रखना। श्वास को अंदर भरने के बाद सहज रूप से रोकें। इसे धीरे-धीरे 5 से 10 सेकंड तक बढ़ाएं।
  3. रेचक – श्वास को बाहर छोड़ना। नाक से धीरे-धीरे सांस छोड़ें और पेट को संकुचित करें।

ध्यान के समय पूरक → कुम्भक → रेचक का चक्र 5-10 बार करें। फिर श्वास को स्वाभाविक छोड़कर आज्ञा चक्र या सहस्रार पर ध्यान केंद्रित करें। इससे मन शांत होगा और ऊर्जा संतुलित होगी। 🙏


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