mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

guru ji kripya Rechak-Kumbhak-Purak or dhiyan karne ka sahi vidhi kya hai k bare me bhi avgat karaye

  guru ji kripya Rechak-Kumbhak-Purak or dhiyan karne ka sahi vidhi kya hai k bare me bhi avgat karaye ?


रेचक, कुम्भक और पूरक प्राणायाम की तीन मुख्य अवस्थाएँ हैं:

  1. पूरक – श्वास को गहराई से भरना। नाक से धीरे-धीरे लंबी सांस लें और पेट व फेफड़ों को पूरी तरह भरें।
  2. कुम्भक – सांस को रोके रखना। श्वास को अंदर भरने के बाद सहज रूप से रोकें। इसे धीरे-धीरे 5 से 10 सेकंड तक बढ़ाएं।
  3. रेचक – श्वास को बाहर छोड़ना। नाक से धीरे-धीरे सांस छोड़ें और पेट को संकुचित करें।

ध्यान के समय पूरक → कुम्भक → रेचक का चक्र 5-10 बार करें। फिर श्वास को स्वाभाविक छोड़कर आज्ञा चक्र या सहस्रार पर ध्यान केंद्रित करें। इससे मन शांत होगा और ऊर्जा संतुलित होगी। 🙏


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