Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

ध्यान कर्ते 15 min के बात ऐसा लगा कि किसी ने मुझे छुवा है इसका क्या मतलब है

 ध्यान कर्ते 15 min के बात ऐसा लगा कि किसी ने मुझे छुवा है इसका क्या मतलब है ?


ध्यान के दौरान 15 मिनट बाद स्पर्श महसूस होना ऊर्जा जागरण और सूक्ष्म जगत से जुड़ाव का संकेत हो सकता है। यह कई कारणों से हो सकता है:

  1. ऊर्जा प्रवाह – जब कुंडलिनी शक्ति सक्रिय होती है, तो शरीर में हल्की स्पर्श या झटके जैसी अनुभूति हो सकती है।
  2. सूक्ष्म उपस्थिति – किसी दिव्य शक्ति, गुरु कृपा, या आत्मिक ऊर्जा का संकेत हो सकता है।
  3. चेतना का विस्तार – जब ध्यान गहरा होता है, तो इंद्रियाँ सूक्ष्म स्तर पर कार्य करने लगती हैं।

डरें नहीं, ध्यान जारी रखें और इस अनुभूति को सहज रूप से स्वीकार करें। ✨

Comments

  1. Dhyan ke samay automatic hi aankh upar ki taraf shift ho jana aur aankh gol gol ghumna ka kya matlab hota hai

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