Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

2 sal brahmchari jaate hue Ho Gaya fir bhi meri buddhi nahin ban rahi hai ulta mein sharir se kamjor ban raha hun Shayad ek vyayam karta hun bhojan subah Na aaye kamvasna aati hai fir bhi Guru jaisa kyon Ho Raha hai ?

 2 sal brahmchari jaate hue Ho Gaya fir bhi meri buddhi nahin ban rahi hai ulta mein sharir se kamjor ban raha hun Shayad ek vyayam karta hun bhojan subah Na aaye kamvasna aati hai fir bhi Guru jaisa kyon Ho Raha hai ?


ब्रह्मचर्य का पालन करने के बावजूद बुद्धि तेज़ न होना और शरीर कमजोर होना, यह संकेत है कि ऊर्जा सही दिशा में नहीं जा रही

संभावित कारण:

  1. प्राण ऊर्जा का सही संचार न होना – ब्रह्मचर्य का सही प्रभाव तब होता है जब ऊर्जा ऊर्ध्वगामी होती है।

  2. व्यायाम की कमी – केवल एक व्यायाम पर्याप्त नहीं, पूरे शरीर को सक्रिय करें।

  3. असंतुलित आहार – पोषक तत्वों की कमी कमजोरी ला सकती है।

उपाय:

  • अच्छा पौष्टिक आहार लें (सूखे मेवे, देशी घी, फल, दूध)।

  • सूर्य प्रणाम और प्राणायाम करें

  • मूलाधार और नाभि चक्र को संतुलित करें। 🚩

Comments

Popular posts from this blog

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....