Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Agr hm imagine kre kuch touch krne ka or dusre insan ko bhi same bole imagine kro to kya usko bhi same touch ka feeling ayega jo maine kiya plz btaye ?

 Agr hm imagine kre kuch touch krne ka or dusre insan ko bhi same bole imagine kro to kya usko bhi same touch ka feeling ayega jo maine kiya plz btaye ?


अगर आप किसी चीज़ को छूने की कल्पना करते हैं और दूसरे व्यक्ति से भी वही कल्पना करने के लिए कहते हैं, तो उसके लिए भी वही स्पर्श महसूस करना संभव है, लेकिन यह पूरी तरह से उनकी मानसिक संवेदनशीलता और आपके बीच की ऊर्जा कनेक्शन पर निर्भर करेगा। यदि आप दोनों के बीच गहरा मानसिक या आध्यात्मिक जुड़ाव है, तो टेलीपैथी या ऊर्जा के माध्यम से वे भी वैसा ही अहसास महसूस कर सकते हैं। ध्यान, प्राणायाम और मन के संतुलन से यह कनेक्शन और मजबूत हो सकता है।

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